मुंबई धमाकों के दोषी अबू सलेम को रिहाई से पहले भरना होगा ₹16.51 लाख जुर्माना, नहीं चुकाने पर बढ़ सकती है जेल की सजा

अनुज त्यागी

मुंबई। 1993 के मुंबई सीरियल बम धमाकों के दोषी और अंडरवर्ल्ड से जुड़े अबू सलेम की रिहाई से पहले उसे अदालत द्वारा लगाया गया ₹16.51 लाख का जुर्माना जमा करना होगा। केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने शुक्रवार को विशेष टाडा (TADA) अदालत को बताया कि यदि सलेम तय समय तक जुर्माना नहीं भरता है, तो उसे जुर्माना न चुकाने के एवज में 18 साल 6 महीने की अतिरिक्त जेल की सजा काटनी पड़ सकती है।

सीबीआई की ओर से विशेष लोक अभियोजक दीपक साल्वी ने अदालत में कहा कि सुप्रीम कोर्ट द्वारा निर्धारित 25 वर्ष की सजा पूरी होने से पहले अबू सलेम को यह राशि अदालत की रजिस्ट्री में जमा करनी होगी। एजेंसी के मुताबिक जुर्माना 12 अक्टूबर 2030 तक या उससे पहले जमा करना अनिवार्य है।

यह जुर्माना दो अलग-अलग मामलों में लगाया गया था। पहला मामला 12 मार्च 1993 को मुंबई में हुए सिलसिलेवार बम धमाकों से जुड़ा है, जिसमें 250 से अधिक लोगों की मौत हुई थी और सैकड़ों लोग घायल हुए थे। दूसरा मामला मुंबई के बिल्डर प्रदीप जैन की हत्या का है। इन दोनों मामलों में अबू सलेम को उम्रकैद की सजा के साथ आर्थिक दंड भी सुनाया गया था।

दरअसल, पिछले महीने अबू सलेम ने विशेष टाडा अदालत में एक अर्जी दाखिल कर यह स्पष्ट करने की मांग की थी कि उसे कुल कितना जुर्माना जमा करना है और भुगतान की प्रक्रिया क्या होगी। इसके बाद अदालत ने जेल प्रशासन और सीबीआई से इस संबंध में रिपोर्ट मांगी थी।

इस महीने की शुरुआत में नासिक सेंट्रल जेल प्रशासन ने अदालत को बताया कि सलेम पर लगाया गया जुर्माना अब तक जमा नहीं हुआ है। जेल अधिकारियों ने यह भी कहा कि यदि वह जुर्माना नहीं चुकाता है तो संबंधित मामलों में तय डिफॉल्ट सजा के अनुसार उसे 18 वर्ष 6 महीने की अतिरिक्त कैद भुगतनी होगी।

गौरतलब है कि अबू सलेम को वर्ष 2005 में पुर्तगाल से भारत प्रत्यर्पित किया गया था। प्रत्यर्पण के दौरान भारत ने पुर्तगाल को आश्वासन दिया था कि उसे 25 वर्ष से अधिक जेल में नहीं रखा जाएगा। बाद में सुप्रीम कोर्ट ने भी स्पष्ट किया कि उसकी 25 वर्ष की सजा 12 अक्टूबर 2030 को पूरी होगी। हालांकि अब उसकी रिहाई से पहले जुर्माने का भुगतान भी कानूनी रूप से महत्वपूर्ण शर्त बन गया है।

अब इस मामले में अदालत के अगले आदेश पर सभी की नजरें टिकी हैं। यदि अबू सलेम निर्धारित समय सीमा के भीतर जुर्माना जमा कर देता है, तो उसकी रिहाई की प्रक्रिया आगे बढ़ सकती है। लेकिन भुगतान नहीं होने की स्थिति में उसे अतिरिक्त सजा भुगतनी पड़ सकती है।

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