दहेज हत्या के मामले में पति को फांसी की सजा, मुजफ्फरनगर फास्ट ट्रैक कोर्ट का बड़ा फैसला

मुजफ्फरनगर। करीब आठ साल पुराने दहेज हत्या के मामले में मुजफ्फरनगर की फास्ट ट्रैक कोर्ट ने आरोपी पति नदीम को मृत्युदंड की सजा सुनाई है। अदालत ने दोषी पर एक लाख रुपये का अर्थदंड भी लगाया है। मामला शाहपुर थाना क्षेत्र का है, जहां विवाहिता शमशीदा को दहेज की मांग को लेकर प्रताड़ित करने और मिट्टी का तेल डालकर आग लगाने का आरोप था। गंभीर रूप से झुलसी शमशीदा की उपचार के दौरान मौत हो गई थी।

मामले की सुनवाई एडीजे/एफटीसी कोर्ट नंबर-3 के न्यायाधीश रवि कुमार दिवाकर की अदालत में हुई। अभियोजन की ओर से शासकीय अधिवक्ता कुलदीप कुमार ने मामले में प्रभावी पैरवी की।

दहेज को लेकर विवाहिता को प्रताड़ित करने का आरोप

अभियोजन के अनुसार, बागपत के निवाड़ा निवासी दिलशाद ने 23 जुलाई 2018 को शाहपुर थाने में तहरीर देकर अपनी बेटी शमशीदा के ससुराल पक्ष पर दहेज के लिए प्रताड़ित करने का आरोप लगाया था। आरोप था कि ससुराल में शमशीदा के साथ मारपीट की जाती थी और दहेज की मांग को लेकर उसे लगातार परेशान किया जा रहा था।

मामले में आरोप लगाया गया कि 28 जुलाई 2018 को शमशीदा पर मिट्टी का तेल डालकर आग लगा दी गई। गंभीर रूप से झुलसी शमशीदा को उपचार के लिए अस्पताल ले जाया गया, जहां हालत गंभीर होने के चलते उसे दिल्ली के अस्पताल में भर्ती कराया गया। उपचार के दौरान उसकी मौत हो गई।

डेथ डिक्लेरेशन बना अहम साक्ष्य

शासकीय अधिवक्ता कुलदीप कुमार के मुताबिक, इस मामले में पुलिस और अभियोजन की ओर से कुल 11 गवाह पेश किए गए। हालांकि सुनवाई के दौरान कई गवाह पक्षद्रोही हो गए, लेकिन घटना से पहले मजिस्ट्रेट के समक्ष दर्ज कराया गया शमशीदा का मृत्यु कालीन कथन (डेथ डिक्लेरेशन) मामले में महत्वपूर्ण साक्ष्य साबित हुआ।

अभियोजन के अनुसार, तत्कालीन मजिस्ट्रेट अशोक कुमार ने शमशीदा का डेथ डिक्लेरेशन दर्ज किया था। अदालत ने इसी महत्वपूर्ण साक्ष्य समेत अभियोजन की ओर से प्रस्तुत अन्य साक्ष्यों का परीक्षण करते हुए आरोपी नदीम को दोषी माना।

बहन साक्ष्य के अभाव में बरी

इस मामले में नदीम के साथ उसकी बहन सोनी भी आरोपी थी। हालांकि अभियोजन द्वारा प्रस्तुत साक्ष्यों के आधार पर अदालत ने सोनी को साक्ष्य के अभाव में बरी कर दिया। वहीं मामले की सुनवाई के दौरान आरोपी की मां और शमशीदा की सास की मृत्यु हो गई थी।

26 अगस्त 2018 को गिरफ्तार हुआ था नदीम

पुलिस ने आरोपी नदीम को 26 अगस्त 2018 को गिरफ्तार किया था। विवेचना पूरी करने के बाद पुलिस ने 23 नवंबर 2018 को न्यायालय में आरोप पत्र दाखिल किया। इसके बाद करीब आठ वर्षों तक मामले की सुनवाई चली।

पुलिस के अनुसार, ऑपरेशन कन्विक्शन के तहत मामले में गवाहों को समय से न्यायालय में पेश कराया गया और अभियोजन पक्ष की ओर से प्रभावी पैरवी करते हुए आरोपी के खिलाफ साक्ष्य प्रस्तुत किए गए। मामले में एडीजीसी कुलदीप कुमार और कोर्ट पैरोकार कांस्टेबल सुमित झां ने भी पैरवी की।

रेयर ऑफ रेयरेस्ट मानते हुए सुनाई मृत्युदंड

अदालत ने उपलब्ध साक्ष्यों और अभियोजन की प्रभावी पैरवी के आधार पर आरोपी नदीम को धारा 302 और 504 आईपीसी के तहत दोषी करार दिया। इसके बाद अदालत ने मामले की गंभीरता को देखते हुए आरोपी को मृत्युदंड यानी फांसी की सजा सुनाई और एक लाख रुपये का अर्थदंड लगाया।

शासकीय अधिवक्ता कुलदीप कुमार ने बताया कि अदालत ने मामले की गंभीरता को देखते हुए इसे रेयर ऑफ रेयरेस्ट श्रेणी का मामला माना। उन्होंने कहा कि इस तरह के मामलों में कानून का डर और भय बना रहना चाहिए तथा पीड़ित को न्याय मिलना चाहिए, ताकि समाज में कानून के प्रति विश्वास कायम रहे।

आठ साल बाद मिला फैसला

यह मामला वर्ष 2018 का है और करीब आठ साल की कानूनी प्रक्रिया के बाद अदालत ने आरोपी पति को मृत्युदंड की सजा सुनाई है। मामले में अभियोजन के लिए शमशीदा का मृत्यु कालीन कथन निर्णायक साक्ष्यों में से एक रहा।

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