पत्नी को तेल डालकर जिंदा जलाने वाले पति नदीम को कोर्ट ने सुनाई फांसी की सज़ा 
राजसत्ता पोस्ट|असलम त्यागी
मुजफ्फरनगर जनपद के शाहपुर के चर्चित शहजादी हत्याकांड में अदालत ने करीब आठ साल बाद बड़ा फैसला सुनाते हुए पति नदीम को हत्या का दोषी करार दिया है। अपर जिला एवं सत्र न्यायालय/फास्ट ट्रैक कोर्ट संख्या-3 के पीठासीन अधिकारी रवि कुमार दिवाकर ने नदीम को फांसी की सजा सुनाई। अदालत ने उस पर डेढ़ लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया है।
मामला वर्ष 2018 का है। बागपत के निवाड़ा निवासी दिलशाद ने अपनी बेटी शहजादी का निकाह 10 जनवरी 2015 को शाहपुर निवासी नदीम के साथ किया था। आरोप था कि शादी के करीब एक साल बाद नदीम शराब पीकर शहजादी के साथ मारपीट करने लगा और उसे तलाक देने की धमकी देता था।
अभियोजन के अनुसार, 23 जुलाई 2018 की रात नदीम शराब के नशे में घर पहुंचा और शहजादी के साथ मारपीट की। खाना खाने के बाद दोबारा विवाद हुआ और नदीम ने तलाक की धमकी दी। इसके बाद कथित तौर पर शहजादी पर मिट्टी का तेल डालकर आग लगा दी गई।
गंभीर रूप से झुलसी शहजादी को उपचार के लिए पहले बेगराजपुर मेडिकल कॉलेज और फिर मेरठ के अस्पताल ले जाया गया। हालत गंभीर होने पर उसे दिल्ली के सफदरजंग अस्पताल में भर्ती कराया गया। वहां 28 जुलाई 2018 को उसकी मौत हो गई।
मामले में 24 जुलाई को अस्पताल में तत्कालीन कार्यपालक मजिस्ट्रेट अशोक कुमार ने शहजादी का मृत्युकालिक बयान दर्ज किया था। अदालत ने इसी बयान को दोषसिद्धि में महत्वपूर्ण आधार माना। शहजादी ने बयान में पति द्वारा शराब पीकर मारपीट करने, गाली देने और तलाक की धमकी देने की बात कही थी।
सुनवाई के दौरान मृतका के पिता दिलशाद, मां और भाई शाहरुख खान अपने पूर्व बयानों से मुकर गए और आरोपियों के पक्ष में गवाही दी। इसके बावजूद अदालत ने मजिस्ट्रेट के समक्ष दर्ज मृत्युकालिक बयान को विश्वसनीय माना।
अदालत ने माना कि दहेज हत्या और अतिरिक्त दहेज की मांग का आरोप साबित नहीं हुआ, लेकिन नदीम ने जान से मारने की नीयत से शहजादी पर केरोसिन डालकर आग लगाई थी। इसी आधार पर उसे भारतीय दंड संहिता की धारा 302 के तहत दोषी ठहराते हुए फांसी की सजा सुनाई गई। मामले में आरोपी ननद सोनी को साक्ष्यों के अभाव में बरी कर दिया गया।

