भाजपा के ‘सारथी’ स्व. जसवंत सिंह सोलंकी को स्थापना दिवस पर श्रद्धांजलि, विरासत को आगे बढ़ा रहे दादू सिंह सोलंकी

बुंदेलखंड में भाजपा की नींव मजबूत करने वाले ‘सारथी’ थे स्व. जसवंत सिंह सोलंकी, पिता के आदर्श और पुत्र का संकल्प, जसवंत सिंह सोलंकी की विरासत को आगे बढ़ा रहे दादू सिंह सोलंकी 

विशेष रिपोर्ट | आकांक्षा शुक्ला

भारतीय जनता पार्टी के स्थापना दिवस पर आज हम याद कर रहे हैं झांसी भाजपा के स्तंभ रहे पूर्व जिलाध्यक्ष स्व. जसवंत सिंह सोलंकी जी को। संगठन के प्रति अटूट निष्ठा और आपातकाल से लेकर राम मंदिर आंदोलन तक उनकी सक्रियता आज भी कार्यकर्ताओं के लिए प्रेरणा है। उनके आदर्शों को जीवित रखते हुए उनके पुत्र दादू सिंह सोलंकी आज जनसेवा की उसी मशाल को आगे बढ़ा रहे हैं।

भारतीय जनता पार्टी का इतिहास केवल सत्ता का सफर नहीं, बल्कि जसवंत सिंह सोलंकी जैसे समर्पित जननायकों के संघर्ष की गाथा है। 1 जनवरी 1945 को जन्मे जसवंत सिंह जी ने 1975 से संघ के अनुशासित स्वयंसेवक के रूप में अपनी यात्रा शुरू की।
​आपातकाल का दौर रहा हो या संगठन विस्तार का, उन्होंने हर मोर्चे पर अपनी क्षमता सिद्ध की। 1977 में जनता पार्टी के जिला मंत्री से शुरू हुआ उनका सफर, 1985 से 1991 के बीच झांसी भाजपा के जिलाध्यक्ष के रूप में स्वर्णिम काल तक पहुँचा। उनके कुशल नेतृत्व का ही परिणाम था कि वे प्रदेश और राष्ट्रीय कार्य परिषद के सदस्य के रूप में पार्टी की नीतियों को नई दिशा देते रहे। ​राम जन्मभूमि आंदोलन के दौरान उनकी भूमिका अविस्मरणीय रही। जब राज्य सरकार ने रामभक्तों को बंदी बनाया, तब जसवंत सिंह जी और उनकी टीम ने हजारों कारसेवकों के भोजन और सेवा का प्रबंध किया। इतना ही नहीं डॉ. मुरली मनोहर जोशी के नेतृत्व में श्रीनगर के लाल चौक पर तिरंगा फहराने के साहसिक अभियान में भी उन्होंने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। ​

राजनीति के साथ-साथ समाज सेवा उनके जीवन का अभिन्न अंग रही।कॉपरेटिव बैंक और रानी लक्ष्मीबाई ग्रामीण बैंक के संचालक के रूप में उन्होंने किसानों की मदद की, तो वहीं शिक्षा के क्षेत्र में कई शिक्षण संस्थानों के प्रबंधक के रूप में भविष्य की पीढ़ी को संवारा। 20 से अधिक स्वास्थ्य शिविरों और निराश्रितों की सेवा के माध्यम से उन्होंने अंतिम पायदान पर खड़े व्यक्ति की चिंता की। ​आज वे शारीरिक रूप से हमारे बीच नहीं हैं, लेकिन उनकी विरासत को उनके पुत्र दादू सिंह सोलंकी पूरी निष्ठा से आगे बढ़ा रहे हैं। मऊरानीपुर और झांसी-ललितपुर क्षेत्र में अपने पिता के बताए जनसेवा के मार्ग पर चलते हुए दादू सिंह आज भी भाजपा की विचारधारा को सशक्त कर रहे हैं। भाजपा के इस स्थापना दिवस पर, जसवंत सिंह सोलंकी जी का व्यक्तित्व हमें याद दिलाता है कि संगठन और राष्ट्रहित से बड़ा कुछ भी नहीं है।

 

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