डॉ. इन्द्रदेव सिंह – सिद्धांत, संघर्ष और समर्पण की राजनीति का एक सशक्त नाम

असलम त्यागी

उत्तर प्रदेश के जनपद बिजनौर की 19–बढ़ापुर विधानसभा से चार बार लगातार विधायक रहे डॉ. इन्द्रदेव सिंह (चौहान) भारतीय राजनीति में एक ऐसे व्यक्तित्व के रूप में पहचाने जाते हैं, जिन्होंने शिक्षा, संगठन, संघर्ष और सेवा—चारों को जीवन का आधार बनाया। वे न केवल एक अनुभवी जनप्रतिनिधि रहे, बल्कि विचारधारा के प्रति अडिग और जनसरोकारों के प्रति पूर्णतः समर्पित नेता के रूप में भी प्रतिष्ठित हैं।

बिजनौर जनपद के धामपुर के महाराणा प्रताप चौक निवासी डॉ. इन्द्रदेव सिंह का जन्म एक शिक्षित, संस्कारवान और राष्ट्रवादी परिवार में हुआ। उनके पिता स्वर्गीय डॉ. दुर्गा सिंह—एम.ए. (हिंदी, संस्कृत), एल.एल.बी.—1968 से 1970 तक मुजफ्फरनगर जनपद में जनसंघ के संगठन मंत्री रहे तथा विश्व हिंदू परिषद में मुरादाबाद विभाग के मंत्री के रूप में भी सक्रिय भूमिका निभाई। माता स्वर्गीय शकुंतला देवी बी.ए.एम.एस. थीं। यही कारण है कि सेवा, शिक्षा और संगठन उनके जीवन में स्वाभाविक रूप से समाहित रहे। डॉ. इन्द्रदेव सिंह स्वयं एम.एससी. (रसायन शास्त्र), एम.ए. (अर्थशास्त्र) एवं बी.ए.एम.एस. जैसी उच्च शैक्षिक योग्यताओं से परिपूर्ण हैं। राजनीति में आने से पूर्व और उसके साथ-साथ उन्होंने बौद्धिक एवं सामाजिक स्तर पर भी निरंतर सक्रियता बनाए रखी।

राजनीतिक यात्रा और संगठनात्मक दक्षता

डॉ. इन्द्रदेव सिंह भारतीय जनता पार्टी से चार बार विधायक निर्वाचित होकर बढ़ापुर विधानसभा का प्रतिनिधित्व कर चुके हैं। संगठन ने उनकी कार्यक्षमता पर विश्वास जताते हुए उन्हें कई महत्वपूर्ण जिम्मेदारियाँ सौंपीं। 1999 से 2002 तक वे भारतीय चिकित्सा परिषद, उत्तर प्रदेश (लखनऊ) के चेयरमैन रहे 2025 के बिहार विधानसभा चुनाव में उन्हें जीरादेई विधानसभा (सीवान) का प्रभारी बनाया गया—जहाँ पार्टी ने पहली बार विजय प्राप्त की।

हरियाणा के 2014 विधानसभा चुनाव में ‘सोहना’ विधानसभा, ठाकुरद्वारा उपचुनाव, भाजपा प्रदेश कार्यसमिति की सदस्यता और 2016-17 में बिजनौर जनपद के सभी थानों पर प्रभावी प्रदर्शन, ये सभी उनके संगठनात्मक कौशल के प्रमाण हैं।

संघर्ष, जेल यात्रा और वैचारिक प्रतिबद्धता

डॉ. इन्द्रदेव सिंह की राजनीति सुविधा की नहीं, बल्कि संघर्ष की राजनीति रही है। डोडा नरसंहार के विरोध में जम्मू में गिरफ्तारी, 1992 में कांग्रेस द्वारा भाजपा सरकारें गिराए जाने के विरोध में भूतपुरी (अफजलगढ़) में 5-6 दिन की जेल, 1993 में धामपुर में रामनवमी जुलूस रोके जाने के विरोध में गिरफ्तारी, रामपुर में पं. दीनदयाल उपाध्याय की प्रतिमा हटाए जाने के विरोध में आंदोलन, राम जन्मभूमि आंदोलन के दौरान चार बार जेल यात्रा और भाजपा के विभिन्न आंदोलनों में कम से कम चार बार कारावास—यह सब उनके वैचारिक साहस और प्रतिबद्धता को दर्शाता है। 2017 विधानसभा चुनाव से पूर्व लखनऊ में विधानसभा घेराव के दौरान वे चोटिल भी हुए।

संघ, विद्यार्थी परिषद और बजरंग दल से गहरा जुड़ाव

डॉ. इन्द्रदेव सिंह का जीवन राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से गहराई से जुड़ा रहा है। धामपुर में शिवाजी व प्रताप शाखा के मुख्य शिक्षक, तहसील संपर्क प्रमुख, आईटीसी-ओटीसी सहभागिता, तथा संघ के विभिन्न कार्यक्रमों में सक्रिय भूमिका निभाई।

अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद में 1988 में जिला संयोजक (बिजनौर) और 1993 में मेरठ संभाग संयोजक रहे। बजरंग दल की सक्रियता के कारण ही अयोध्या आंदोलन के दौरान बिजनौर जनपद से सर्वाधिक कारसेवक उनके नेतृत्व में पहुँचे, जिस दिन मुलायम सिंह यादव सरकार द्वारा गोली चलवाई गई थी।

जनसेवा ही राजनीति का उद्देश्य

लगभग 28 वर्षों से क्षेत्र में सतत संपर्क, ईमानदारी, परिश्रम, गरीब-अमीर सभी के प्रति समान सम्मान, सामाजिक समस्याओं के लिए निरंतर संघर्ष—यही डॉ. इन्द्रदेव सिंह की पहचान रही है। दलित, मुस्लिम और समाज के सभी वर्गों का व्यापक समर्थन उन्हें मिलता रहा है। वर्तमान में भी वे पार्टी की सक्रिय कार्यप्रणाली में पूरी निष्ठा के साथ संलग्न हैं।

डॉ. इन्द्रदेव सिंह ऐसे नेता हैं, जिनकी राजनीति पद से नहीं, सिद्धांत से चलती है। वे आज भी संगठन और समाज—दोनों के लिए एक प्रेरणास्रोत बने हुए हैं।

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