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45 साल पुराने बोझ से मिली मुक्ति, चोरी की सामान लौटाकर मांगी दिल से माफी
नानौता।सहारनपुर
कहते हैं कि सच्चा पश्चाताप इंसान को भीतर से झकझोर देता है। कुछ ऐसा ही उदाहरण नानौता क्षेत्र में देखने को मिला, जहां करीब 45 वर्ष पूर्व गुस्से में की गई एक छोटी-सी गलती का बोझ एक व्यक्ति के मन पर वर्षों तक बना रहा। आखिरकार साहस जुटाकर उसने न केवल चोरी की गई वस्तु लौटाई, बल्कि पूरे सम्मान के साथ क्षमा भी मांगी।
ग्राम जड़ौदा पांडा निवासी नरेश त्यागी पुत्र बिसम्बर त्यागी नानौता के पूर्व सभासद अनीस कुरैशी के निवास पर पहुंचे और उन्हें पूरी घटना से अवगत कराया। नरेश त्यागी ने बताया कि लगभग 45 साल पहले, अनीस कुरैशी के पिता स्वर्गीय सगीर घोड़ा-बग्गी चलाकर नानौता से जड़ौदा पांडा आया-जाया करते थे। एक दिन उनका घोड़ा उनके खेत में घुस गया और फसल को नुकसान पहुंचाने लगा।
उस समय गुस्से में आकर नरेश त्यागी ने घोड़े को पकड़ लिया और उसके गले में बंधी टाल्ली (घंटी) निकाल ली। वह टाल्ली वे घर ले आए और दीवार पर टांग दी। लेकिन उसी दिन से यह घटना उनके मन में एक टीस बनकर रह गई। उन्होंने बताया कि जब-जब उनकी नजर उस दीवार पर टंगी टाल्ली पर पड़ती, उन्हें अपनी गलती का एहसास होता और आत्मग्लानि सताती रहती।
नरेश त्यागी ने बताया कि वे कई बार नानौता आए, घोड़े के मालिक का पता लगाने की कोशिश की, लेकिन जानकारी नहीं मिल सकी। हाल ही में जब उन्हें सही जानकारी मिली तो उन्होंने बिना देर किए अपनी भूल स्वीकार करने का निर्णय लिया और टाल्ली लौटाने तथा क्षमा मांगने नानौता पहुंचे। यहां पहुंचकर उन्हें यह जानकर गहरा दुख हुआ कि सगीर अब इस दुनिया में नहीं रहे।
पूर्व सभासद अनीस कुरैशी ने नरेश त्यागी की ईमानदारी, साहस और पश्चाताप की भावना की सराहना की और कहा कि इस तरह का उदाहरण समाज में दुर्लभ है। उन्होंने कहा कि गलती स्वीकार कर उसे सुधारने का साहस ही इंसान को महान बनाता है।
यह घटना न केवल इंसानियत और नैतिकता का संदेश देती है, बल्कि यह भी सिखाती है कि देर से ही सही, सच्चाई और माफी का रास्ता अपनाने से मन को शांति जरूर मिलती है।

