थानाभवन की वायरल तस्वीर ने बढ़ाई सियासी हलचल? भाजपा–असपा की नज़दीकियों पर क्यों उठ रहे हैं बड़े सवाल

शामली की राजनीति में इन दिनों एक तस्वीर ने जबरदस्त चर्चा छेड़ दी है। भाजपा के पूर्व मंत्री सुरेश राणा और नगर पंचायत गढ़ी पुख़्ता के आज़ाद समाज पार्टी (असपा) के चेयरमैन प्रतिनिधि अंकुज चौधरी की मुलाक़ात की तस्वीर सोशल मीडिया पर वायरल होते ही सियासी गलियारों में तरह-तरह के कयास लगाए जाने लगे हैं। सवाल साफ है—क्या यह सिर्फ़ शिष्टाचार भेंट थी या फिर इसके पीछे कोई सियासी समझदारी चल रही है?

मामला केवल मुलाक़ात तक सीमित नहीं बताया जा रहा। हाल ही में नगर पंचायत में लगभग एक करोड़ रुपये के टेंडर जारी किए गए थे। चर्चाओं के मुताबिक, चेयरमैन प्रमोद कुमार अपनी पसंद के ठेकेदार को काम न मिल पाने से नाराज़ बताए जा रहे हैं, क्योंकि सरकारी दरों से कम पर विकास कार्य किसी अन्य ठेकेदार को मिल गया। इसी क्रम में जिला अधिकारी को कथित तौर पर गलत या भ्रामक तथ्यों के आधार पर शिकायत दिए जाने की बातें भी सामने आ रही हैं।

इतना ही नहीं, तीन दिन पहले नगर पंचायत कार्यालय में एक बाबू के साथ हुई हाथापाई की घटना ने भी माहौल को और गरमा दिया। सूत्रों का कहना है कि अपने काम साधने और दबाव बनाने के लिए असपा नेतृत्व ने पहले रालोद विधायक से संपर्क साधा और अब तस्वीरों में भाजपा के कद्दावर नेता के दरवाज़े पर दस्तक देती नज़र आ रही है।

राजनीतिक चर्चाओं में यह कयास भी तेज़ हैं कि असपा के नगर पंचायत अध्यक्ष भाजपा में शामिल होने की ज़मीन तैयार कर रहे हैं। चर्चा यह भी है कि पूर्व की कथित अनियमितताओं को ढकने और भविष्य में किसी संभावित कार्रवाई से बचने के लिए राजनीतिक संरक्षण की तलाश की जा रही है। इसी संदर्भ में वायरल तस्वीर को लोग सामान्य मुलाक़ात नहीं, बल्कि किसी संभावित सियासी तालमेल का संकेत मान रहे हैं।

अब सवाल यह नहीं कि तस्वीर क्यों वायरल हुई, बल्कि यह है कि पर्दे के पीछे चल रही यह सियासी गतिविधि कब तक छिपी रहेगी? क्या क्षेत्रीय राजनीति में कोई बड़ा खेल आकार ले रहा है? और यदि ऐसा है, तो जनता के सामने इसकी सच्चाई कब आएगी?

यह रिश्ता क्या कहलाता है—सियासी संयोग या सियासी सौदा?

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