एनएमडीसी में निदेशक (कार्मिक) की नियुक्ति इंटरव्यू से पहले विवादों में, पीईएसबी की भूमिका पर उठे गंभीर सवाल
दिल्ली, 22 दिसंबर।
भारत सरकार की नवरत्न कंपनी एनएमडीसी में निदेशक (कार्मिक) पद पर होने वाली नियुक्ति प्रक्रिया को लेकर विवाद गहराता जा रहा है। 23 दिसंबर को प्रस्तावित इंटरव्यू से पहले ही लोक उद्यम चयन बोर्ड (पीईएसबी) की निष्पक्षता पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। सबसे ज्यादा आपत्ति उम्मीदवारों की शॉर्टलिस्टिंग प्रक्रिया को लेकर जताई जा रही है।
पीईएसबी द्वारा 10 दिसंबर 2025 को 12 उम्मीदवारों की शॉर्टलिस्ट जारी की गई थी, जिन्हें 23 दिसंबर को इंटरव्यू के लिए बुलाया गया है। इस सूची में एनएमडीसी के 5 आंतरिक उम्मीदवार और अन्य लोक उपक्रमों से 7 अधिकारी शामिल हैं। एनएमडीसी के आंतरिक उम्मीदवारों में दो महाप्रबंधक (जीएम) और तीन उपमहाप्रबंधक (डीजीएम) स्तर के अधिकारी शामिल हैं। आरोप है कि जीएम और उससे वरिष्ठ स्तर के कई अनुभवी अधिकारियों के नाम जानबूझकर सूची से बाहर कर दिए गए, जबकि उनके पास कार्मिक विभाग में वर्षों का अनुभव है।
स्पेशल केस में बुलावा बना सबसे बड़ा विवाद
सबसे अधिक विवाद एनएमडीसी के एक्जीक्यूटिव डायरेक्टर शिवेन्द्र बहादुर सिंह को इंटरव्यू के लिए अलग से बुलाए जाने को लेकर है। पीईएसबी ने 19 दिसंबर को विशेष सूचना जारी कर उन्हें 13वें उम्मीदवार के रूप में इंटरव्यू के लिए आमंत्रित किया। अधिसूचना के अनुसार, 16 दिसंबर को श्री सिंह की रिप्रेजेंटेशन पर विचार करते हुए उन्हें “स्पेशल केस” में शामिल किया गया।
इस निर्णय के बाद सवाल उठ रहे हैं कि अन्य उम्मीदवारों को अपनी बात रखने का अवसर क्यों नहीं दिया गया। इंटरव्यू से ठीक चार दिन पहले किसी एक व्यक्ति विशेष को अलग से बुलाने का क्या औचित्य है और यह फैसला किस दबाव या प्रभाव में लिया गया।
सूत्रों का दावा है कि जिस अधिकारी को स्पेशल केस में बुलाया गया है, उनका कार्मिक विभाग में कोई अनुभव नहीं रहा है। ऐसे में अनुभवी और योग्य अधिकारियों को दरकिनार कर उन्हें मौका दिए जाने को लेकर गंभीर संदेह पैदा हो गया है। यदि उनका चयन होता है, तो पीईएसबी की निष्पक्षता और निर्णय प्रक्रिया पर बड़ा सवाल खड़ा होगा, जिसका असर केंद्र सरकार और कार्मिक मंत्रालय की छवि पर भी पड़ सकता है।
अपने खास को बैठाने की कवायद तेज
सूत्रों के अनुसार एनएमडीसी में निदेशक (कार्मिक) के पद पर अपने-अपने खास लोगों को बैठाने की कोशिशें अंदरखाने तेज हैं। रेलवे पृष्ठभूमि से आए एनएमडीसी के शीर्ष अधिकारी इस पद पर अपने पुराने सहयोगी को लाने की लॉबिंग कर रहे हैं, जो वर्तमान में एक केंद्रीय पीएसयू में कार्मिक निदेशक हैं। वहीं इस्पात मंत्रालय से जुड़े सेल (सेल) के वरिष्ठ अधिकारी भी अपने करीबी को एनएमडीसी में पदस्थ कराने की कोशिशों में जुटे हैं।
जानकार बताते हैं कि एनएमडीसी की मौजूदा निदेशक (कार्मिक) का कार्यकाल 31 जनवरी 2026 को समाप्त हो रहा है। उनके कार्यकाल में नियुक्तियों और ट्रांसफर-पोस्टिंग को लेकर कई बार सवाल उठे हैं। आरोप है कि अपनी जगह किसी करीबी को बैठाने की मंशा से ही 13वें उम्मीदवार के रूप में विशेष बुलावा दिलवाया गया है।
कुल मिलाकर एनएमडीसी में निदेशक (कार्मिक) की नियुक्ति प्रक्रिया अब पारदर्शिता और निष्पक्षता के बड़े सवालों के घेरे में आ चुकी है।

