पूर्व पीएम के पोते प्रज्वल रेवन्ना को उम्रकैद की सजा के बाद पुलिस वाहन में ले जाते हुएपूर्व पीएम देवेगौड़ा के पोते प्रज्वल रेवन्ना को रेप केस में उम्रकैद और ₹10 लाख जुर्माने की सजा सुनाई गई। कोर्ट में वह फूट-फूटकर रोने लगे।

प्रज्वल रेवन्ना उम्रकैद की सजा के बाद अब पूरे देश में इस मामले की चर्चा हो रही है। कोर्ट ने जिस तरह इस केस को गंभीरता से लिया और तेज़ी से फैसला सुनाया, उसने सबको चौंका दिया।

कौन हैं प्रज्वल रेवन्ना?

प्रज्वल रेवन्ना जनता दल (सेक्युलर) के नेता और पूर्व प्रधानमंत्री एच.डी. देवगौड़ा के पोते हैं। वह 2019 में हासन सीट से लोकसभा सांसद बने थे। परिवार की राजनीतिक पकड़ कर्नाटक में काफी मजबूत मानी जाती है।

क्या है मामला?

केस की शुरुआत अप्रैल 2024 में होलेनरसीपुरा (हसन) के फार्महाउस में हुई घटना से हुई, जिसमे एक वीडियो वायरल हुआ। जहां प्राथमिक सेविका के आरोपों के अनुसार उसका दो बार दुष्कर्म किया गया और यह क्लिप्स मोबाइल फोन में रिकॉर्ड की गयीं।

उसके बाद जिसमें प्रज्वल रेवन्ना पर यौन शोषण के गंभीर आरोप लगे। पीड़िता एक 48 वर्षीय घरेलू सहायिका थीं। इस मामले की जांच के लिए SIT का गठन हुआ।

कोर्ट का फैसला: उम्रकैद और जुर्माना

बेंगलुरु की विशेष अदालत ने IPC की धारा 376(2)(n) के तहत प्रज्वल को उम्रकैद की सजा सुनाई। साथ ही ₹10 लाख जुर्माना और ₹7 लाख पीड़िता को मुआवज़ा देने का आदेश दिया गया।

कोर्ट में रो पड़े प्रज्वल

फैसले के बाद प्रज्वल रेवन्ना ने अदालत में कहा:

“मेरी एकमात्र गलती यह थी कि मैंने राजनीति में तेजी से आगे बढ़ने की कोशिश की।”
इसके बाद वह फूट-फूटकर रो पड़े।

SIT जांच और सबूत

SIT ने इस केस में 180 से अधिक दस्तावेज़, 26 गवाह और वीडियो फॉरेंसिक जांच के आधार पर चार्जशीट दाखिल की। अदालत ने इन सबूतों को स्वीकार करते हुए फैसला सुनाया।

यह फैसला क्यों अहम है?

  • यह मामला दिखाता है कि कोई भी कानून से ऊपर नहीं है।
  • महिलाओं की सुरक्षा को लेकर समाज में एक सशक्त संदेश गया है।
  • राजनीति में नैतिकता की चर्चा फिर से शुरू हो गई है।

निष्कर्ष

प्रज्वल रेवन्ना उम्रकैद का यह फैसला भारतीय न्याय व्यवस्था के लिए एक बड़ा उदाहरण है। यह संदेश साफ है कि चाहे व्यक्ति कितना भी ताकतवर क्यों न हो, अगर उसने कानून तोड़ा है तो उसे सज़ा मिलेगी।

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