सर्वोच्च अदालत के फैसले का सम्मान करें देश के शिक्षण संस्थान: देवबंदी उलेमा
हिजाब पहनकर विद्यालय आने वाली मुस्लिम छात्राओं को ना रोका जाए
सहारनपुर, देवबंद।प्रशांत त्यागी
उत्तर प्रदेश के बिजनौर और कानपुर में हिजाब पहनकर विद्यालय आने वाली मुस्लिम छात्राओं को रोके जाने के मामले पर देवबंदी उलेमाओं ने गहरी नाराजगी व्यक्ति की है। देवबंद के मौलाना मुफ्ती असद कासमी ने कहा की जब देश की सर्वोच्च अदालत ने मामले में देश के शिक्षण संस्थानों को कड़ी फटकार लगाते हुए कहा है कि किसी भी धर्म की छात्रा को हिजाब पहनकर विद्यालय आने से रोक नहीं जा सकता है, अगर छात्र विद्यालयकी वेशभूषा में आ रहा है और अपने धार्मिक परंपरा का निर्वाह भी कर रहा है तो ऐसे में कुछ भी गलत नहीं है। स्कूल और कॉलेज शिक्षा के स्थान है, उन्हें राजनीतिक अड्डा ना बनाया जाए। मौलाना मुफ्ती असद कासमी ने कहा देश के सभी शिक्षण संस्थानों को सुप्रीम कोर्ट के फैसले का सम्मान करना चाहिए। जो स्कूल सुप्रीम कोर्ट के इस आदेश का पालन नहीं करते हैं तो ऐसे विद्यालयों के खिलाफ सख्त कार्रवाई होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि विद्यालय सभी धर्म के लोगों के लिए सम्मान का केंद्र है। हिंदू हो या मुस्लिम सभी धर्म के बच्चे विद्यालय में पढ़ते हैं। तो ऐसी स्थिति में वहां पर किसी भी धर्म के बच्चे के साथ भेदभाव की नीति नहीं होनी चाहिए। उन्होंने बिजनौर और कानपुर के प्रकरण पर प्रदेश सरकार से स्कूल संचलको के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है। उन्होंने कहा हिजाब हमारी संस्कृति है और संस्कृति से खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं की जा सकती।
रिपोर्ट प्रशांत त्यागी

