लोकसभा चुनाव 2024……

मुस्लिम मतों का ध्रुवीकरण रोकना भाजपा के लिए होगा बड़ी सियासी चुनौती

2019 में बसपा प्रत्याशी के पाले में मुस्लिम मतों का हुआ था ध्रुवीकरण

इस बार सपा कांग्रेस गठबंधन भाजपा को देगा बड़ी चुनौती

बसपा प्रत्याशी भी कर सकते हैं बड़ा उलटफेर

प्रशांत त्यागी, देवबंद। संवाददाता

लोकसभा चुनाव में अभी कुछ समय ही बचा है। भाजपा से लेकर कांग्रेस और बसपा अपने पक्ष में मुस्लिम समुदाय का ध्रुवीकरण करने की रणनीति पर काम कर रहे हैं। सहारनपुर की राजनीति में मुस्लिम मतदाता किसी भी समय बड़ा उलट फिर करने में सक्षम है।

सपा कांग्रेस गठबंधन के बाद सहारनपुर की राजनीति क्या एक बार फिर से बड़ी करवट लेगी यह तो आने वाला भविष्य ही बताएगा। लेकिन इस बार राजनीतिक दल बड़ी ही सटीक रणनीति के तहत काम कर रहे हैं। वजह सहारनपुर का सियासी समीकरण। जहां बसपा अकेले चुनावी मैदान में लोकसभा चुनाव की तैयारी का आगाज कर चुकी है, जिसके तहत आगामी दिनों में बसपा सुप्रीमो मायावती सहारनपुर से ही लोकसभा चुनाव का शंखनाद कर सकती है। बसपा इस सीट पर मुस्लिम और दलित गठबंधन बनाकर 2019 के फार्मूले को एक बार फिर से आजमाने में लगी है

तो वही कांग्रेस में शामिल हुए इमरान मसूद सपा के परंपरागत वोट बैंक और कांग्रेस के सहारे अपनी चुनावी वैतरणी पार लगाने में लगे हैं। इमरान मसूद जहां एक और मुस्लिम मतदाताओं में अपनी गहरी पैठ के लिए जाने जाते हैं, तो वह दूसरी और सपा के परंपरागत वोट बैंक यादव, और अन्य समाज के मतदाताओं को जोड़कर मुस्लिम मतदाताओं का ध्रुवीकरण अपने पक्ष में करने की रणनीति पर काम कर रहे हैं। दूसरी और भाजपा के चुनावी रणनीति इन सभी राजनीतिक दलों से अलग-थलग। भाजपा हिंदुत्व और दलित वोट बैंक में सेंधमारी कर सहारनपुर लोकसभा सीट को फिर से कब्जाने‌ के लिए पूरी ताकत के साथ काम कर रही है। लेकिन सभी राजनीतिक दलों की नजर अपने पक्ष में मतों का ध्रुवीकरण कराने की है। आंकड़ों पर गौर करें तो जहां सहारनपुर लोकसभा क्षेत्र में 17 लाख 51 हजार मतदाता आते हैं, जिनमें 9 लाख के करीब दलित और मुस्लिम मतदाता हैं, इसके बाद सिर्फ 8 लाख 50 हजार के करीब हिंदू मतदाता आते हैं। अब देखने वाली बात यह होगी कि लोकसभा चुनाव में इस बार ध्रुवीकरण ज्यादा से ज्यादा किस राजनीतिक दल के पक्ष में होता है उसके आधार पर ही यहां हर जीत का अंतर तय होगा।

तो त्रिकोणीय मुकाबला‌ होने के आसार…..

सहारनपुर लोकसभा सीट पर इस बार त्रिकोणीय मुकाबला तय माना जा रहा है। बात कर तो जहां कांग्रेस सपा गठबंधन और मुस्लिम में मतदाताओं के सारे चुनावी मैदान में उतरने की तैयारी कर रही है। तुम ही बसपा दलित और मुस्लिम वोट बैंक के जरिए अपने पक्ष में ध्रुवीकरण कर कर दोनों ही राजनीतिक दलों को पहले की तरह पटकनी देने की योजना बना रही है। इसके इधर भाजपा हिंदू वोट बैंक के सहारे गायन दोनों राजनीतिक दलों को पस्त करने की तैयारी में है।

भाजपा फिर से राघव लखनपाल शर्मा पर खेल सकती है दांव

सहारनपुर लोकसभा क्षेत्र की बात करें तो जहां कांग्रेस सपा गठबंधन से इमरान मसूद मजबूत दावेदार माने जा रहे हैं, तो वहीं बसपा से पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष के पति माजिद अली चुनावी मैदान में उतर सकते हैं। बात करें भाजपा की तो भाजपा से सहारनपुर लोकसभा सीट के लिए राघव लखनपाल शर्मा मजबूत दावेदार माने जाते हैं। इनके अलावा राज्य मंत्री बृजेश सिंह, राज्य मंत्री जसवंत सैनी, पूर्व कैबिनेट मंत्री सुरेश राणा समेत कहीं बड़े दिग्गज चुनावी लाइन में है। लेकिन संभावना जताई जा रही है कि यहां से फिर से ही ब्राह्मण चेहरे के रूप में राघव लखनपाल शर्मा चुनाव लड़ सकते हैं।

प्रशांत त्यागी

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