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2024 लोकसभा चुनाव नजदीक आने से राजनीतिक गलियारों में गहमा गहमी का माहौल है। सूत्रों की मानें तो उत्तर प्रदेश की राजनीति में भाजपा एक बार फिर से बड़ा उलटफेर करने जा रही है, इस बार सूत्र बताते हैं कि राष्ट्रीय लोकदल व भाजपा के बीच बीते कुछ समय में नजदीकिया काफी बढ़ी हैं और आने वाले समय में आरएलडी अगर एनडीए में शामिल होती है इसका सीधा फायदा पश्चिमी उत्तरप्रदेश में भाजपा को मिल सकता है ।
हालांकि राजनीतिक प्रतिद्वंदता से अलग राष्ट्रीय लोकदल के मुखिया राज्यसभा सांसद जयंत चौधरी के पिछले बयान व टिप्पणियां अगर भाजपा हाईकमान भुला भी दे तो भी धरातल के कार्यकर्ताओं के लिए यह गठबंधन काफी पेचीदा होगा ।
सरकार की हर नीति के विरोधी जयंत चौधरी किस प्रकार अब भाजपा की नीतियों को क्षेत्र को समझा पाएंगे ये भी देखने लायक बात होगी।
सूत्रों का दावा इसलिए भी मजबूत कहा जा रहा है, क्योंकि हाल ही में राहुल गांधी के धान बुआई के फोटो के बाद आए जयंत चौधरी के ट्वीट में कहा गया है कि “अगर चावल ही खाने हैं तो खीर खाओ ” इस ट्वीट के मायने में खीर “भाजपा” को ही समझा जा रहा है।
वहीं रालोद के प्रदेश अध्यक्ष रामशीष राय ने भी हाल ही में दिए एक इंटरव्यू में इसके संकेत दिए हैं उन्होंने कहा कि सपा के साथ आने से उनके दल को नुकसान हुआ है, हमारी मान्यता रद्द हो गई है और हम लोकसभा में कम से कम 12 सीट मांग रहे हैं।
गठबंधन के कयासों पर चर्चाओं का दौर

सामाजिक संस्था पैगाम ए इंसानियत के सदर हाजी आसिफ राही का कहना है कि मुजफ्फरनगर दंगों के बाद स्व. चौधरी अजीत सिंह ने पहले दिन से जाट और मुस्लिमों के बीच पैदा हुई दूरी को खत्म करने का प्रयास किया और वो इसमें कामयाब भी हुए थे, इसके फलस्वरूप वर्ष 2019 के लोकसभा चुनाव मे हर वर्ग ने उन्हें भरपूर वोट किया। चौधरी साहब के बाद जयंत चौधरी भी इसी राह पर चले और सेक्युलर पार्टियों के साथ मिलकर चुनाव लड़े, जिसमें जनता ने मुजफ्फरनगर के आम चुनाव व उप चुनाव को मिलाकर 5 सीटों पर राष्ट्रीय लोकदल के प्रत्याशियों को जिताया फिर भी अगर जयंत चौधरी सपा का साथ छोड़कर सत्ता पक्ष के साथ जाने का फैसला करते हैं तो अचरज नहीं होना चाहिए क्योंकि राजनीति में कुछ भी संभव है लेकिन जनता को उन्हें उनके द्वारा किए गये वादे और बातें ज़रूर याद दिलानी चाहिए। मेरे विचार से मुस्लिमों को भी किसी भी तरह की ज़िद छोड़कर अपने समाज के भविष्य को देखते हुए आगे का फैसला करना चाहिए !

किसान नेता व समाजसेवी अशोक बालियान का कहना है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की राष्ट्रहित की नीतियां हैं, देर सबेर सभी उनको समझ रहे है, विरोधी पक्ष भी उनकी नीतियों पर चिंतन कर रहा है, इसलिए उनकी नीतियों से प्रभावित होकर उनके व उनकी नीतियों के पक्ष में आ रहे हैं।
मूसा क़ासमी (ज़िला सचिव) जमीयत उलेमा-ए-हिंद का कहना है कि वर्ष 2013 दंगों के बाद जो सामजिक ताना बाना टूट गया था, बड़ी जद्दोजहद और कोशिशों के बाद सामाज के ज़िम्मेदार लोगों के साथ मिलकर उस चौड़ी खाई को पाटने और आपसी भाईचारा बनाने का काम हुआ, इस मुहिम में स्वर्गीय चौधरी अजीत सिंह और जयन्त चौधरी की अहम भूमिका रही,
आज समाज में विश्वास की एक आस जगी है, राजनीति से ऊपर उठकर इसको देखना होगा। जहां तक चुनावी मुद्दे की बात है तो मुस्लिम समाज को अपने मुद्दों (शिक्षा, सुरक्षा, रोज़गार ) को सामने रख कर किसी को समर्थन करना या नहीं करना इस पर विचार करना चाहिए।

इस विषय पर धर्मेंद्र मलिक राष्ट्रीय प्रवक्ता भारतीय किसान यूनियन (अराजनैतिक) ने कहा कि इसमें कोई अतिशयोक्ति नहीं है और जयंत चौधरी के पिता स्वर्गीय चौधरी अजीत सिंह भी एनडीए में रह चुके हैं और भाजपा किसी के लिए अछूत भी नहीं है।
वहीं दूसरी ओर राष्ट्रीय लोकदल के नेताओं से बात करने पर नेताओं ने कहा कि ऐसा नहीं होगा हम भारतीय जनता पार्टी गठबंधन में शामिल नहीं हो सकते। हम उनके नीतियों के खिलाफ लगातार संघर्ष कर रहे हैं तो ऐसा होना नामुमकिन है।

ऐसा कुछ नहीं सिर्फ अफवाह फैला रहे: सुरेंद्र शर्मा
राष्ट्रीय लोकदल के राष्ट्रीय मीडिया कॉर्डिनेटर और मीडिया सचिव सुरेंद्र शर्मा का कहना है कि ऐसी अफवाह भाजपा की तरफ से यूपी विधानसभा चुनावों से पूर्व भी फैलाई गई थी और अब भी यही हो रहा है। रालोद बीजेपी गठबंधन की कोई संभावना नहीं है।

