भाजपा के पूर्व विधायक की बेटी यशस्वी राजे सिंह ने शिक्षा व्यवस्था पर उठाए सवाल, धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की भाषा पर भी की टिप्पणी

उत्तर प्रदेश के फतेहपुर से पूर्व भाजपा विधायक विक्रम सिंह की बेटी यशस्वी राजे सिंह ने जंतर-मंतर पर हुए छात्र आंदोलन, शिक्षा व्यवस्था और पूर्व केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे को लेकर खुलकर अपनी प्रतिक्रिया दी है। एक इंटरव्यू के दौरान उन्होंने कहा कि छात्रों की चिंताओं को गंभीरता से सुना जाना चाहिए और शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता व जवाबदेही सुनिश्चित करना समय की आवश्यकता है।

कतर के समाचार चैनल अल जज़ीरा को दिए गए इंटरव्यू में यशस्वी राजे सिंह ने पूर्व केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की भाषा पर सवाल उठाए। उनका कहना था कि इस्तीफे में आत्ममंथन, जिम्मेदारी स्वीकार करने या छात्रों और अभिभावकों के प्रति संवेदना व्यक्त करने के बजाय “शहादत” का भाव अधिक दिखाई देता है। उन्होंने कहा कि ऐसे संवेदनशील मुद्दे पर सरकार की ओर से जवाबदेही स्पष्ट रूप से सामने आनी चाहिए थी।

उन्होंने केंद्र सरकार द्वारा प्रह्लाद जोशी को शिक्षा मंत्री बनाए जाने के फैसले पर भी अपनी असहमति जताई। उनके अनुसार शिक्षा व्यवस्था से जुड़े गंभीर संकट के बीच ऐसे फैसलों पर व्यापक सोच-विचार और जवाबदेही की आवश्यकता है।

यशस्वी राजे सिंह ने इंटरव्यू में यह भी स्पष्ट किया कि वह आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर हैं और अपने विचार स्वतंत्र रूप से व्यक्त करती हैं। उन्होंने बताया कि राजनीतिक मतभेदों के बावजूद परिवार में सौहार्द बनाए रखने के लिए वह इन विषयों पर अपने पिता, पूर्व भाजपा विधायक विक्रम सिंह, से चर्चा नहीं करतीं।

उन्होंने जंतर-मंतर पर हुए छात्र आंदोलन का समर्थन करते हुए कहा कि परीक्षा प्रणाली, शिक्षा व्यवस्था और छात्रों के भविष्य से जुड़े मुद्दों को केवल राजनीतिक बहस तक सीमित नहीं रखा जाना चाहिए। उनका मानना है कि छात्रों की आवाज को गंभीरता से सुनना और शिक्षा व्यवस्था में आवश्यक सुधार करना सरकार की प्राथमिकता होनी चाहिए।

गौरतलब है कि नीट पेपर लीक और परीक्षा प्रणाली में कथित अनियमितताओं को लेकर देशभर में छात्र आंदोलन और विरोध प्रदर्शन हुए हैं। इस मुद्दे पर विभिन्न राजनीतिक दलों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और सार्वजनिक हस्तियों की लगातार प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं। शिक्षा व्यवस्था में सुधार, पारदर्शिता और निष्पक्ष परीक्षा प्रणाली को लेकर बहस अभी भी जारी है।

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