भोपाल में एक मठ के पते से 40 पासपोर्ट जारी, दो आरोपी गिरफ्तार, STF द्वारा जांच जारी

राजसत्ता पोस्ट|असलम त्यागी

मध्य प्रदेश|भोपाल के गोविंदपुरा क्षेत्र के अन्ना नगर स्थित अशोक बुद्ध विहार मठ के एक ही पते का इस्तेमाल 40 से अधिक पासपोर्ट बनवाने में किए जाने का मामला सामने आया है। इनमें कई पासपोर्ट वर्ष 2021, 2022 और 2023 में जारी किए गए बताए जा रहे हैं। इस पते से जुड़े दस्तावेजों और पुलिस सत्यापन की जांच हो रही है।

इससे पहले डबरा के सिमरिया टेकरी स्थित बौद्ध विहार कॉलोनी के एक ही पते से करीब 30 लोगों के नाम पर पासपोर्ट जारी होने की जानकारी सामने आई थी। इसके बाद भोपाल के अशोक बुद्ध विहार मठ का पता भी जांच के दायरे में आया। जांच एजेंसी को आशंका है कि पासपोर्ट बनवाने के लिए अलग-अलग पतों का इस्तेमाल किया गया।

STF के मुताबिक, प्रदेशभर में अलग-अलग पतों का इस्तेमाल करके जारी किए गए करीब 70 संदिग्ध पासपोर्टों की जानकारी सामने आई है। इनमें से अब तक 22 पासपोर्टों की पुष्टि की गई है। मामले में STF ने रियाल चौधरी और विप्लब अधिकारी को गिरफ्तार किया है। एजेंसी आरोपियों से पूछताछ कर नेटवर्क की कड़ियां जोड़ रही है।

मठ प्रबंधन को सत्यापन की जानकारी नहीं होने का दावा

STF के दावे की पड़ताल करने टीम अशोक बुद्ध विहार मठ पहुंची। मठ प्रबंधन और वहां मौजूद भिक्षु का कहना है कि उन्हें इस मामले की जानकारी नहीं थी। एक भिक्षु ने बताया कि वह 28 जुलाई को वर्षावास के लिए मठ पहुंचे थे और 29 जुलाई से वर्षावास शुरू हुआ। उनके अनुसार, उन्हें पासपोर्ट या जांच की जानकारी नहीं मिली।

मठ प्रबंधन का दावा है कि पुलिस की कोई सत्यापन टीम पासपोर्ट आवेदकों के पते की जांच के लिए मठ नहीं पहुंची। प्रबंधन के मुताबिक STF ने भी उनसे संपर्क नहीं किया है। इससे सवाल उठ रहा है कि यदि पासपोर्ट आवेदनों में मठ का पता दिया गया था, तो पुलिस वेरिफिकेशन के दौरान आवेदकों की पहचान और निवास की पुष्टि कैसे की गई।

पुलिस वेरिफिकेशन की भूमिका जांच के केंद्र में

STF जांच कर रही है कि पासपोर्ट जारी होने से पहले की पुलिस सत्यापन प्रक्रिया में कोई गड़बड़ी या लापरवाही तो नहीं हुई। एजेंसी यह भी पता लगा रही है कि संदिग्ध पासपोर्टों के आवेदन किसने तैयार किए, दस्तावेज कहां से जुटाए गए, आवेदकों को एक ही पते से कैसे जोड़ा गया और सत्यापन में किन अधिकारियों की भूमिका रही। जांच एजेंसी अब पुलिस सत्यापन की पूरी प्रक्रिया और उससे जुड़े रिकॉर्ड भी खंगाल रही है।

फिलहाल STF गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ कर रही है। जांच में यह भी पता लगाया जा रहा है कि मठ और अन्य पतों का इस्तेमाल किस उद्देश्य से हुआ और इसके पीछे कौन लोग शामिल हैं।

बौद्ध अनुयायी बनकर विदेश यात्रा

जांच में यह जानकारी भी सामने आई है कि फर्जी भारतीय पासपोर्ट हासिल करने वाले कुछ लोग खुद को बौद्ध अनुयायी बताकर विदेश यात्रा करते थे। इन्हीं दस्तावेजों के आधार पर थाईलैंड, मलेशिया, चीन, श्रीलंका और जापान जाने की जानकारी मिली है। टीम यह पता लगा रही है कि इसके पीछे फर्जी पहचान थी या कोई अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क।

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