हजारों लोगों ने स्वर्गीय बाबू नारायण सिंह को दी भावभीनी श्रद्धांजलि, प्रेरणा स्थल पर उमड़ा जनसैलाब
अनुज त्यागी
मुज़फ्फरनगर। उत्तर प्रदेश के प्रथम उपमुख्यमंत्री, प्रख्यात किसान नेता एवं जनसेवा के प्रति समर्पित स्वर्गीय बाबू नारायण सिंह जी की 39वीं पुण्यतिथि पर रविवार को ग्राम नसीरपुर स्थित प्रेरणा स्थल पर श्रद्धांजलि सभा का भव्य आयोजन किया गया। कार्यक्रम में मुज़फ्फरनगर, बिजनौर सहित पश्चिमी उत्तर प्रदेश के विभिन्न जनपदों से हजारों किसान, जनप्रतिनिधि, सामाजिक कार्यकर्ता और आम नागरिक पहुंचे। सभी ने पुष्पांजलि अर्पित कर उन्हें श्रद्धापूर्वक नमन किया तथा उनके संघर्षमय जीवन और जनसेवा के कार्यों को स्मरण किया।
श्रद्धांजलि सभा का शुभारंभ वैदिक मंत्रोच्चार के बीच हवन-पूजन के साथ हुआ। इसके उपरांत उपस्थित लोगों ने प्रेरणा स्थल पर स्थापित प्रतिमा एवं चित्र पर पुष्प अर्पित किए। पूरे आयोजन के दौरान स्वर्गीय बाबू नारायण सिंह जी का जीवन संदेश “संघर्ष ही जीवन है” श्रद्धालुओं के बीच चर्चा का विषय बना रहा। वक्ताओं ने कहा कि यह संदेश आज भी समाज और विशेष रूप से युवा पीढ़ी के लिए प्रेरणादायी है।
सभा को संबोधित करते हुए वक्ताओं ने स्वर्गीय बाबू नारायण सिंह के सार्वजनिक जीवन पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि बाबू नारायण सिंह ने अपना संपूर्ण जीवन किसानों, मजदूरों, गरीबों और समाज के कमजोर वर्गों के अधिकारों की रक्षा के लिए समर्पित कर दिया। वे ऐसे जननेता थे जिन्होंने राजनीति को केवल सत्ता प्राप्त करने का माध्यम नहीं, बल्कि समाज सेवा का मार्ग माना। जनता के बीच रहकर उनकी समस्याओं को समझना और उनके समाधान के लिए संघर्ष करना ही उनके जीवन का उद्देश्य था।
वक्ताओं ने कहा कि वर्ष 1967 में प्रदेश की पहली गैर-कांग्रेसी सरकार बनने पर उन्हें उत्तर प्रदेश का प्रथम उपमुख्यमंत्री बनने का गौरव प्राप्त हुआ। अपने कार्यकाल में उन्होंने किसान हित, ग्रामीण विकास और जनकल्याण से जुड़े विषयों को सर्वोच्च प्राथमिकता दी। उनकी सादगी, ईमानदारी, स्पष्टवादिता और जनसरोकारों के प्रति प्रतिबद्धता ने उन्हें पश्चिमी उत्तर प्रदेश की राजनीति में विशिष्ट पहचान दिलाई। मोरना क्षेत्र से जनप्रतिनिधि के रूप में उन्होंने लंबे समय तक जनता की सेवा की और किसान राजनीति के मजबूत स्तंभ के रूप में अपनी अलग पहचान बनाई।
श्रद्धांजलि सभा में उपस्थित लोगों ने कहा कि स्वर्गीय बाबू नारायण सिंह ने कभी पद और प्रतिष्ठा को महत्व नहीं दिया, बल्कि जनता के विश्वास और सेवा को ही अपनी सबसे बड़ी ताकत माना। यही कारण है कि उनके निधन के लगभग चार दशक बाद भी लोग उन्हें उतने ही सम्मान और आत्मीयता से याद करते हैं।
इस अवसर पर बिजनौर के सांसद चंदन चौहान ने कहा कि उनके बाबा स्वर्गीय बाबू नारायण सिंह का जीवन उनके लिए सदैव प्रेरणा का स्रोत रहेगा। उन्होंने कहा कि जनता का विश्वास उनके परिवार की सबसे बड़ी पूंजी है और वे अपने दादा के आदर्शों पर चलते हुए पूरी निष्ठा और ईमानदारी के साथ जनसेवा के लिए समर्पित हैं।
उन्होंने कहा, “मेरे बाबा जी स्वर्गीय बाबू नारायण सिंह जी ने अपना पूरा जीवन किसानों, गरीबों और आम जनता की सेवा में समर्पित किया। आज मैं उनकी तीसरी पीढ़ी के प्रतिनिधि के रूप में बिजनौर की जनता की सेवा कर रहा हूँ। उनका आशीर्वाद और जनता का विश्वास ही मेरी सबसे बड़ी ताकत है। मैं उनके आदर्शों, सादगी और जनसेवा की परंपरा को आगे बढ़ाते हुए हर व्यक्ति की आवाज़ बनने का प्रयास करता रहूँगा। यही उनके प्रति मेरी सच्ची श्रद्धांजलि होगी।”
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कार्यक्रम के समापन पर उपस्थित हजारों लोगों ने दो मिनट का मौन रखकर स्वर्गीय बाबू नारायण सिंह को श्रद्धांजलि अर्पित की तथा उनके बताए मार्ग पर चलने का संकल्प लिया। पूरे आयोजन का वातावरण श्रद्धा, सम्मान और जनसेवा के संकल्प से ओत-प्रोत दिखाई दिया।#RajsattaPost #AnujTyagiPost

