हरे-भरे आम के पेड़ों पर चल रही आरी, लक्कड़ मंडी तक पहुंच रही लकड़ी

असलम त्यागी |चरथावल

मुज़फ्फरनगर जनपद के चरथावल क्षेत्र में इन दिनों हरे-भरे आम के पेड़ों की अवैध कटाई का मामला लगातार तूल पकड़ता जा रहा है। आरोप है कि पर्यावरणीय नियमों को दरकिनार करते हुए बड़ी संख्या में आम के पेड़ों पर आरी चलाई जा रही है। कटे हुए पेड़ों की लकड़ी ट्रैक्टर-ट्रॉली के माध्यम से चरथावल-थानाभवन मार्ग स्थित लक्कड़ मंडी में पहुंचाई जा रही है।

सूत्रों के अनुसार मंडी में ताजी, हरी आम की लकड़ी जड़ों सहित भारी मात्रा में देखी गई है। इस संबंध में जब वन विभाग के एक अधिकारी से जानकारी ली गई तो उन्होंने संतोषजनक जवाब नहीं दिया। स्थानीय जानकारों का आरोप है कि यह अवैध कटान वन विभाग की कथित मिलीभगत से हो रहा है।

मंडी में खुलेआम खरीद-फरोख्त के आरोप

स्थानीय लोगों का कहना है कि लक्कड़ मंडी में कुछ लकड़ी व्यापारी अवैध रूप से काटी गई आम की लकड़ी खरीदकर लाभ कमा रहे हैं और इस तरह इस अवैध कारोबार को बढ़ावा दे रहे हैं। ग्रामीणों के अनुसार यह पूरा खेल खुलेआम चल रहा है, लेकिन अब तक कोई ठोस प्रशासनिक कार्रवाई सामने नहीं आई है।

पर्यावरण को गंभीर खतरा

विशेषज्ञों का मानना है कि आम के पेड़ केवल फल उत्पादन का साधन नहीं, बल्कि पर्यावरण संतुलन के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण हैं। बड़े पैमाने पर कटान से तापमान में वृद्धि, वर्षा चक्र में असंतुलन और भूजल स्तर में गिरावट की आशंका बढ़ सकती है। साथ ही पक्षियों व अन्य जीव-जंतुओं का प्राकृतिक आवास भी प्रभावित हो रहा है।

ग्रामीणों ने वन विभाग और प्रशासन से अवैध कटान पर तत्काल रोक लगाने, लक्कड़ मंडी में हो रही खरीद-फरोख्त की निष्पक्ष जांच कराने और दोषी लकड़ी व्यापारियों के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की मांग की है।

स्थानीय नागरिकों का कहना है कि यदि समय रहते प्रभावी कदम नहीं उठाए गए तो क्षेत्र की हरियाली को अपूरणीय क्षति पहुंच सकती है।

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