71 वर्षीय विधवा महिला की जमीन फर्जी तरीके से बैनामा कराने का आरोप, मुकदमा दर्ज कराने की मांग

कृपा शंकर

सिद्धार्थनगर। जिले के बांसी तहसील क्षेत्र के खेसरहा ब्लॉक अंतर्गत ग्राम भलुहा में एक 71 वर्षीय विधवा महिला की जमीन कथित रूप से धोखाधड़ी कर बैनामा कराने का मामला सामने आया है। पीड़िता ने गांव के कुछ लोगों पर विश्वास का गलत फायदा उठाकर नामांतरण कराने के बहाने जमीन अपने नाम कराने का आरोप लगाया है। महिला ने कोतवाली बांसी में तहरीर देकर मुकदमा दर्ज करने और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है। मामले को लेकर क्षेत्र में चर्चाओं का दौर जारी है।

ग्राम भलुहा निवासी सुखना देवी पत्नी स्वर्गीय दशरथ ने पुलिस को दिए शिकायती पत्र में बताया कि उनके पति का निधन 10 फरवरी 2025 को हो गया था। पति की मृत्यु के बाद परिवार की कृषि भूमि और राजस्व संबंधी कार्यों की जिम्मेदारी उन्हीं पर आ गई। उनके तीन पुत्र विनोद कुमार, राजकुमार और विजय कुमार रोजगार के सिलसिले में अधिकांश समय घर से बाहर रहते हैं, जिसके कारण वह अकेले ही सभी कार्यों का संचालन कर रही थीं।

पीड़िता के अनुसार उनके पति के नाम गाटा संख्या 80 रकबा 0.093 हेक्टेयर, गाटा संख्या 191क रकबा 0.089 हेक्टेयर तथा गाटा संख्या 81 रकबा 0.902 हेक्टेयर भूमि दर्ज है। पति की मृत्यु के बाद राजस्व अभिलेखों में अपना और अपने पुत्रों का नाम दर्ज कराने की प्रक्रिया शुरू करने के लिए उन्होंने गांव के परिचित लोगों पर भरोसा किया।

सुखना देवी का आरोप है कि गांव के दो व्यक्तियों ने उन्हें विश्वास में लेकर कहा कि तहसील में नामांतरण की प्रक्रिया पूरी करानी है। इसी बहाने वे उन्हें मोटरसाइकिल से बांसी ले गए। रास्ते भर और कार्यालय में भी उन्हें यही बताया जाता रहा कि जमीन पर उनका और उनके पुत्रों का नाम दर्ज कराया जा रहा है। महिला का आरोप है कि इसी दौरान सुनियोजित तरीके से उन्हें धोखे में रखकर 14 मई 2026 को उनकी पूरी हिस्सेदारी का बैनामा कमलावती पत्नी रामचंद्र के नाम करा दिया गया।

पीड़िता ने बताया कि वह पूरी तरह अशिक्षित हैं और दस्तावेजों की कानूनी प्रक्रिया को समझने में सक्षम नहीं हैं। उन्हें इस बात की कोई जानकारी नहीं थी कि नामांतरण की जगह जमीन के विक्रय संबंधी दस्तावेज तैयार किए जा रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि बैनामा संबंधी दस्तावेजों में उनके मोबाइल नंबर के स्थान पर किसी अन्य व्यक्ति का नंबर दर्ज कराया गया, ताकि उन्हें किसी प्रकार की सूचना या सत्यापन संबंधी जानकारी प्राप्त न हो सके।

महिला के अनुसार कुछ दिनों बाद गांव में जमीन बिकने की चर्चा सुनकर उन्हें संदेह हुआ। इसके बाद उन्होंने अपने पुत्रों को पूरे मामले की जानकारी दी। जब परिजनों ने दस्तावेजों की जांच कराई तो कथित फर्जी बैनामे की जानकारी सामने आई। सुखना देवी का कहना है कि उन्हें जमीन के बदले किसी प्रकार की धनराशि नहीं मिली और पूरी प्रक्रिया छल एवं धोखाधड़ी के माध्यम से पूरी की गई है।

मामले को लेकर जब उप निबंधक बांसी राकेश राम से जानकारी ली गई तो उन्होंने बताया कि 14 मई को वह किसी आवश्यक कार्य से जिला मुख्यालय गए हुए थे। उस दिन का बैनामा निबंधन लिपिक अमित कुमार पांडे द्वारा कराया गया था। उन्होंने कहा कि रजिस्ट्री की प्रक्रिया निर्धारित नियमों के तहत पूरी की गई है।

वहीं, बांसी कोतवाली प्रभारी निरीक्षक मृत्युंजय पाठक ने बताया कि पीड़िता की तहरीर प्राप्त हो चुकी है। मामले की जांच की जा रही है और जांच में जो भी तथ्य सामने आएंगे, उनके आधार पर आवश्यक विधिक कार्रवाई की जाएगी।

ग्रामीण क्षेत्र में सामने आए इस मामले ने बुजुर्ग और अशिक्षित लोगों के साथ संभावित धोखाधड़ी के मुद्दे को फिर से चर्चा में ला दिया है। अब सभी की नजर पुलिस जांच पर टिकी है कि जांच में क्या तथ्य सामने आते हैं और पीड़िता को न्याय मिल पाता है या नहीं।

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