करोड़ों सरकारी धन के दुरुपयोग के मुख्य आरोपी बाबू को हटाने की मांग, भ्रष्टाचार की जांच कराने को सभासदों ने डीएम को सौंपा शिकायती पत्र
राजसत्ता पोस्ट |असलम त्यागी
मुजफ्फरनगर जनपद के नगर पंचायत चरथावल में आठ वर्ष पूर्व हुए करीब छह करोड़ रुपये के सरकारी धन के कथित दुरुपयोग के मामले में विजिलेंस द्वारा दर्ज एफआईआर में नामजद वरिष्ठ लिपिक महेश प्रसाद को तत्काल हटाने तथा उनके वर्तमान कार्यकाल में कराए जा रहे विकास कार्यों,कोटेशन के आधार पर किए गए खरीददारी और छोटे निर्माण कार्यों की उच्चस्तरीय जांच कराने की मांग को लेकर नगर पंचायत के सभासदों ने जिलाधिकारी उमेश मिश्रा को शिकायती पत्र सौंपा है। सभासदों का आरोप है कि विजिलेंस मुकदमे के बावजूद संबंधित बाबू अब भी नगर पंचायत में महत्वपूर्ण दायित्व निभा रहे हैं।
शिकायती पत्र में कहा गया है कि वर्ष 2020 में नगर पंचायत चरथावल में करीब छह करोड़ रुपये के सरकारी धन के कथित दुरुपयोग के मामले में विजिलेंस ने तत्कालीन नगर पंचायत अध्यक्ष बीना त्यागी, तत्कालीन अधिशासी अधिकारी वेद प्रकाश, तत्कालीन अवर अभियंता कुशलवीर सिंह, तत्कालीन एवं वर्तमान वरिष्ठ लिपिक महेश प्रसाद, विवादित ठेकेदार हारून अली, साई कॉरपोरेशन फर्म के संचालक सोनू चौधरी तथा मैसर्स सुपरटेक इंजीनियरिंग के प्रवीण मान के विरुद्ध भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, धोखाधड़ी एवं अन्य धाराओं में मुकदमा दर्ज किया है।
सभासदों ने शिकायती पत्र में आरोप लगाया कि एफआईआर दर्ज होने के बावजूद वरिष्ठ लिपिक महेश प्रसाद अब भी नगर पंचायत चरथावल का अतिरिक्त प्रभार संभाल रहे हैं। उनके कार्यकाल में कराए जा रहे विकास कार्यों, टेंडर प्रक्रिया, कोटेशन और भुगतान में अनियमितताओं की आशंका जताते हुए इन सभी मामलों की निष्पक्ष एवं उच्चस्तरीय जांच कराने की मांग की गई है।
महिला सभासदों ने भी अलग से दिए गए शिकायती पत्र में आरोप लगाया कि वरिष्ठ लिपिक का व्यवहार निर्वाचित महिला जनप्रतिनिधियों के प्रति उचित नहीं है तथा जनहित से जुड़े कार्यों के प्रति उदासीनता बरती जाती है। उन्होंने इस संबंध में भी कार्रवाई की मांग की है।
सभासदों ने जिलाधिकारी से मांग की है कि विजिलेंस एफआईआर में नामजद वरिष्ठ लिपिक महेश प्रसाद को तत्काल नगर पंचायत चरथावल से हटाया जाए तथा उनके वर्तमान कार्यकाल में कराए गए विकास कार्यों, टेंडरों, कोटेशन और वित्तीय लेनदेन की स्वतंत्र एवं उच्चस्तरीय जांच कराई जाए। यदि जांच में अनियमितताएं सामने आती हैं तो संबंधित अधिकारियों, कर्मचारियों और अन्य जिम्मेदार व्यक्तियों के विरुद्ध नियमानुसार कड़ी कार्रवाई की जाए।


