Anuj Tyagi
किसान और कृषि को बजट में किया गया नजरअंदाज : धर्मेंद्र मलिक
मुजफ्फरनगर।
भारतीय किसान यूनियन (अराजनैतिक) के राष्ट्रीय प्रवक्ता धर्मेंद्र मलिक ने केंद्र सरकार के आम बजट पर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा कि वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण द्वारा पेश किए गए बजट में देश की कृषि और किसानों को पूरी तरह राम भरोसे छोड़ दिया गया है।
उन्होंने कहा कि यह बजट किसानों के लिए निराशाजनक ही नहीं बल्कि कृषि क्षेत्र की गंभीर अनदेखी का प्रतीक है। सरकार ने कृषि को केवल उत्पादकता बढ़ाने तक सीमित कर दिया है, जबकि किसान का वास्तविक कल्याण फसलों का उचित मूल्य मिलने से होता है।
धर्मेंद्र मलिक ने कहा कि उत्पादकता बढ़ाने के लिए अनुकूल मौसम, पर्याप्त पानी, उर्वर मिट्टी, गुणवत्ता युक्त बीज, खाद और कीटनाशक जैसी बुनियादी जरूरतें होती हैं। इनमें से किसी एक की कमी होने पर उत्पादन प्रभावित होता है, लेकिन बजट में इन समस्याओं के समाधान का कोई स्पष्ट रोडमैप नहीं दिया गया है।
उन्होंने कहा कि आर्थिक सर्वेक्षण में कृषि क्षेत्र को लेकर जो चिंताएं सामने रखी गई थीं, बजट में उनके समाधान का कोई उल्लेख नहीं है। साथ ही, पिछले वर्षों में कृषि को लेकर की गई घोषणाओं का भी कोई लेखा-जोखा प्रस्तुत नहीं किया गया।
धर्मेंद्र मलिक ने कहा कि बजट में कृषि क्षेत्र में किसी बड़े सुधार या ठोस बदलाव का संकेत नहीं मिलता। उन्होंने व्यंग्यात्मक लहजे में कहा कि अब किसानों को सरकार से नहीं बल्कि प्रभु श्रीराम से ही उम्मीद लगानी पड़ेगी कि वे किसानों का कल्याण करेंगे।

