कपसाड़ मामला: हवस की भूख में हुआ कत्ल, प्रेम में हत्या नहीं होती — ठाकुर पूरन सिंह

मुज़फ्फरनगर।मेरठ के कपसाड़ गांव में दलित महिला की हत्या और उसकी बेटी के अपहरण के मामले ने सियासी हलकों में हलचल मचा दी है। इस सनसनीखेज प्रकरण को लेकर किसान मजदूर संगठन के राष्ट्रीय अध्यक्ष ठाकुर पूरन सिंह ने एक बार फिर तीखा और विवादित बयान दिया है। मुजफ्फरनगर में मीडिया से बातचीत करते हुए उन्होंने साफ कहा कि “प्रेम करने वाला किसी की हत्या नहीं करता, यह हत्या हवस में की गई है।”

ठाकुर पूरन सिंह ने कहा कि इस पूरे मामले में पहले विधायक और सांसद यह तय कर लें कि वे मरने वाले के साथ खड़े हैं या मारने वालों के साथ। उन्होंने दो टूक कहा कि हत्या किसने की, यह तय करना उनका विषय नहीं है, यह शासन, प्रशासन और पुलिस का काम है। लेकिन परिस्थितियों और बयानों के आधार पर वह यह कहने में कोई संकोच नहीं करते कि यह प्रेम नहीं बल्कि हवस का मामला है।

उन्होंने लड़की के बयान का हवाला देते हुए कहा कि यदि किसी की मां घायल अवस्था में हो, फरसे से वार किया गया हो और तमंचा आरोपी के हाथ में बताया गया हो, तो ऐसी स्थिति में लड़की यह भी कह सकती थी कि “तूने मेरी मां की हत्या कर दी, मैं तेरे साथ नहीं जाऊंगी, चाहे मुझे भी गोली मार दे।” इसके बावजूद दोनों का साथ चले जाना और तीन दिन बाद मिलना कई सवाल खड़े करता है।

किसान नेता ने विधायक अतुल प्रधान के बयान पर भी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि यदि उनके अपने परिवार में भी कोई इस तरह का कृत्य करेगा, तो वे उसे भी हवसी और हवस का शिकारी ही कहेंगे। उन्होंने स्पष्ट किया कि उन्हें न तो वोट चाहिए और न ही किसी तरह की राजनीति, उन्हें सच बोलने की आदत है और समाज को आईना दिखाना जरूरी है।

ठाकुर पूरन सिंह ने कहा कि जनप्रतिनिधियों को पीड़ित के घर जाना चाहिए, न कि वोटर के घर। पीड़ित की मदद करने के कई रास्ते होते हैं—प्रशासनिक अधिकारियों से मिलकर, मुख्यमंत्री या प्रधानमंत्री से मिलकर भी न्याय दिलाने की कोशिश की जा सकती है। उन्होंने आरोप लगाया कि पीड़ित के नाम पर राजनीति की जा रही है।

उन्होंने आगे कहा कि लोकतंत्र में सांसद और विधायक केवल पांच साल के लिए चुने जाते हैं, यह कोई स्थायी पद नहीं है। जनता की सेवा करना उनका कर्तव्य है, न कि सियासी बयानबाजी। साथ ही उन्होंने ‘दलित’ और ‘दलहीत’ की राजनीति में फर्क बताते हुए कहा कि दलितों को आगे बढ़ाने के लिए शिक्षा, स्वास्थ्य और सुरक्षा जरूरी है, न कि केवल राजनीतिक स्वार्थ।

अपने बयान के अंत में उन्होंने सामाजिक और सांस्कृतिक पतन पर चिंता जताते हुए कहा कि गुरुकुल व्यवस्था के खत्म होने से संस्कार कमजोर हुए हैं, रिश्ते टूट रहे हैं और समाज गलत दिशा में जा रहा है। महिलाओं को उन्होंने देश की ताकत, स्वाभिमान और संस्कार बताते हुए कहा कि समाज का भविष्य महिलाओं के संस्कारों से ही सुरक्षित रह सकता है।

कुल मिलाकर, कपसाड़ कांड को लेकर ठाकुर पूरन सिंह के इस बयान ने एक बार फिर राजनीतिक और सामाजिक बहस को तेज कर दिया है, वहीं प्रशासन और पुलिस की जांच पर भी लोगों की नजरें टिकी हुई हैं।

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