किसान शहीद परिवारों की पहचान, हाईकोर्ट बेंच और प्रदूषण के खिलाफ भाकियू अराजनैतिक का बड़ा अभियान

मुजफ्फरनगर। भारतीय किसान यूनियन अराजनैतिक द्वारा 17 जनवरी 2026 को धर्मेंद्र मलिक के आवास, शाकुंतलम कॉलोनी, मुजफ्फरनगर में एक विस्तृत संवाददाता सम्मेलन आयोजित किया गया। प्रेस वार्ता में संगठन ने किसान शहीद परिवारों की पहचान, पश्चिमी उत्तर प्रदेश में हाईकोर्ट बेंच की स्थापना, कैंसर जैसी घातक बीमारियों और बढ़ते प्रदूषण के खिलाफ बड़े आंदोलन की घोषणा की।

संवाददाता सम्मेलन में भारतीय किसान यूनियन अराजनैतिक के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष चौधरी मांगेराम त्यागी ने कहा कि संगठन द्वारा किसान आंदोलनों में शहीद हुए किसानों के परिवारों की पहचान कर उन्हें सम्मानित करने के लिए विशेष अभियान चलाया जाएगा। इस अभियान की जिम्मेदारी संगठन ने उन्हें सौंपी है, जिसकी शुरुआत अगले माह कर्नल राममहेश भरद्वाज के गांव रोहाना से होगी। अभियान का समापन शहीद-ए-आजम भगत सिंह के गांव खटकड़ कलां में किया जाएगा।

भारतीय किसान यूनियन अराजनैतिक के चेयरमैन एवं गठवाला खाप के चौधरी बाबा राजेंद्र सिंह मलिक ने कहा कि पश्चिमी उत्तर प्रदेश की जीवनदायिनी नदियां काली, हिंडन और कृष्णा अब कैंसर फैलाने वाली नदियों में तब्दील हो चुकी हैं। मुजफ्फरनगर, बागपत, मेरठ, शामली, गाजियाबाद, अमरोहा, हापुड़ और मुरादाबाद के गांव-गांव में कैंसर तेजी से फैल रहा है। किसान और मजदूर परिवार इलाज के लिए दिल्ली, चंडीगढ़ और रोहतक जैसे शहरों के चक्कर लगाने को मजबूर हैं।

उन्होंने कहा कि पश्चिमी उत्तर प्रदेश के किसी भी जिला अस्पताल में हार्ट सर्जरी जैसी मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध नहीं हैं। गरीब, किसान और मजदूर परिवार अपनी जमीन और मकान बेचने के बावजूद इलाज नहीं करा पा रहे हैं, जिससे वे आर्थिक रूप से भी पूरी तरह टूट रहे हैं। उन्होंने पश्चिमी उत्तर प्रदेश में एम्स कैंसर हॉस्पिटल, पीजीआई हॉस्पिटल और शामली व बिजनौर में विश्वविद्यालय की स्थापना की मांग दोहराई।

भारतीय किसान यूनियन अराजनैतिक के राष्ट्रीय प्रवक्ता धर्मेंद्र मलिक ने कहा कि पश्चिमी उत्तर प्रदेश के लोग न्याय के लिए सैकड़ों किलोमीटर की दूरी तय करने को मजबूर हैं। यहां न्याय पाना बेहद महंगा और कठिन हो गया है। प्रयागराज हाईकोर्ट पर मुकदमों का अत्यधिक दबाव है, जिससे समय पर न्याय नहीं मिल पा रहा। संगठन पश्चिमी उत्तर प्रदेश में हाईकोर्ट बेंच की स्थापना का पूर्ण समर्थन करता है।

उन्होंने मांग की कि जब तक पश्चिमी उत्तर प्रदेश में हाईकोर्ट बेंच स्थापित नहीं होती, तब तक मेरठ, मुरादाबाद, सहारनपुर, आगरा और अलीगढ़ मंडल को लखनऊ बेंच से संबद्ध किया जाए। उन्होंने सवाल उठाया कि जब प्रदेश के अफसरों और सरकार के लिए लखनऊ में बेंच हो सकती है, तो पश्चिमी उत्तर प्रदेश के लिए क्यों नहीं—यह जनता के लिए आज बड़ा सवाल बन चुका है।

प्रदूषण के मुद्दे पर धर्मेंद्र मलिक ने कहा कि मुजफ्फरनगर में संबंधित विभागों की मिलीभगत के कारण प्रदूषण पर नियंत्रण नहीं हो पा रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि कूड़ा जलाने की किसी भी इकाई को अनुमति नहीं है, फिर भी खुलेआम कूड़ा जलाया जा रहा है और प्रशासन सवालों के जवाब नहीं दे रहा।

उन्होंने चेतावनी दी कि फरवरी के अंत में प्रदूषण को लेकर बड़ा आंदोलन किया जाएगा। यदि प्रशासन को ट्रकों में भरा कूड़ा नजर नहीं आता, तो नागरिक उसे अधिकारियों के घरों तक दिखाने के लिए मजबूर होंगे।

उन्होंने कहा कि मुजफ्फरनगर में स्वच्छ हवा का आपातकाल जैसी स्थिति बन चुकी है। प्रदूषण के कारण नागरिकों में अस्थमा, फेफड़ों की बीमारी, निमोनिया और लंग्स कैंसर जैसी गंभीर बीमारियां बढ़ रही हैं, लेकिन इसकी सजा आम जनता को भुगतनी पड़ रही है।

भारतीय किसान यूनियन अराजनैतिक ने बताया कि 27 से 29 जनवरी तक प्रयागराज में आयोजित होने वाले तीन दिवसीय चिंतन शिविर में इन सभी मुद्दों पर रणनीति तय कर बड़े आंदोलन की औपचारिक घोषणा की जाएगी।

 


 

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