चरथावल में साप्ताहिक पैठ के स्थानांतरण का विरोध तेज, समाजसेवी व गणमान्य लोगों ने आंदोलन की चेतावनी दी
असलम त्यागी
मुज़फ्फरनगर जनपद के नगर पंचायत चरथावल क्षेत्र के खुशरूपुर रोड पर प्रत्येक शुक्रवार को लगने वाली साप्ताहिक पैठ को स्थानांतरित किए जाने के प्रस्ताव को लेकर विरोध तेज हो गया है। पैठ के संभावित स्थानांतरण के विरोध में नगर पंचायत के सभासदों, क्षेत्र के गणमान्य नागरिकों, किसान नेताओं तथा विभिन्न सामाजिक संगठनों के पदाधिकारियों में भारी रोष व्याप्त है। सभी ने एकजुट होकर इस निर्णय को गरीब दुकानदारों के हितों के खिलाफ बताते हुए कड़ा विरोध दर्ज कराया है।
विरोध कर रहे लोगों का कहना है कि वर्षों से खुशरूपुर रोड पर लगने वाली साप्ताहिक पैठ से सैकड़ों छोटे दुकानदारों, ठेला-फड़ और फुटपाथ व्यवसायियों की रोज़ी-रोटी जुड़ी हुई है। आरोप लगाया गया कि पैठ को निजी भूमि पर स्थानांतरित करने के पीछे दुकानदारों से मनमाने ढंग से शुल्क वसूलने और उनका आर्थिक शोषण करने की मंशा है। सभासदों ने दो टूक शब्दों में कहा कि किसी भी सूरत में गरीब दुकानदारों का शोषण बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
नगर पंचायत के सभासदों और गणमान्य नागरिकों ने आरोप लगाया कि कुछ लोग निजी लाभ कमाने के उद्देश्य से साप्ताहिक पैठ को निजी जमीन पर लगवाने का प्रयास कर रहे हैं। इससे न केवल दुकानदारों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ेगा, बल्कि आम जनता को भी आवागमन और खरीदारी में भारी असुविधा का सामना करना पड़ेगा। उनका कहना है कि सार्वजनिक स्थान पर लगने वाली पैठ से व्यवस्था पारदर्शी रहती है और सभी दुकानदारों को समान अवसर मिलता है।
इस मामले में चरथावल थाना प्रभारी सत्य नारायण दहिया ने स्पष्ट किया कि साप्ताहिक पैठ के स्थानांतरण को लेकर पुलिस की ओर से किसी प्रकार का कोई दबाव या हस्तक्षेप नहीं है। उन्होंने कहा कि पुलिस प्रशासन गरीब दुकानदारों के विरोध में नहीं है और इस प्रकरण से पुलिस का कोई लेना-देना नहीं है।
विरोध कर रहे लोगों ने प्रशासन से मांग की कि यदि किसी कारणवश पैठ का स्थानांतरण आवश्यक हो, तो उसे किसी अन्य सरकारी या सार्वजनिक भूमि पर किया जाए, ताकि गरीब दुकानदारों का शोषण न हो सके। निजी जमीन पर पैठ लगाए जाने का वे पुरजोर विरोध करेंगे।
इस मुद्दे को लेकर चरथावल क्षेत्र में दिनभर चर्चाओं का दौर चलता रहा। किसान नेताओं और सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधियों ने भी विरोध को समर्थन देते हुए कहा कि यह मामला सीधे-सीधे गरीब और मेहनतकश दुकानदारों की आजीविका से जुड़ा हुआ है। उन्होंने प्रशासन से साप्ताहिक पैठ को उसके पुराने और निर्धारित स्थान पर ही लगाए रखने की मांग की।
विरोध करने वालों ने चेतावनी दी कि यदि अधिकारियों को अवगत कराने के बावजूद साप्ताहिक पैठ को निजी भूमि पर स्थानांतरित किया गया, तो वे मजबूरन धरना-प्रदर्शन और आंदोलन का रास्ता अपनाएंगे। उन्होंने साफ कहा कि जनता के हितों की अनदेखी किसी भी हाल में बर्दाश्त नहीं की जाएगी।


