सहारनपुर। जैन बाग स्थित प्राचीन जैन मंदिर में आयोजित आठ दिवसीय श्री सिद्ध चक्र महामंडल अनुष्ठान के चतुर्थ दिवस पर प्रातः काल की पावन बेला में श्री महावीर प्रभु के मंगलकारी जिनबिंब का मंगलाभिषेक एवं शांतिधारा विधिवत रूप से संपन्न हुई। इस अवसर पर परम पूज्य आचार्य श्री विमर्शसागर जी महाराज के पाद प्रक्षालन का सौभाग्य विनय जैन (बिन्नी) को तथा श्री रवि जैन (कूलर वाले) को शास्त्र भेंट करने का सौभाग्य प्राप्त हुआ। धर्मसभा को संबोधित करते हुए आचार्य श्री विमर्शसागर जी महाराज ने कहा कि आज हम सभी प्रभु की आराधना मन, वचन और काय की पवित्रता के साथ कर रहे हैं। लेकिन हमें आत्म स्वरूप की महत्ता को समझना होगा। प्रभु महावीर जैसे परमात्मा भी मानव शरीर में आकर कठोर तपस्या और संयम के माध्यम से मोक्ष को प्राप्त करते हैं, तो हम भी उसी मार्ग पर चलकर परम पद को प्राप्त कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि स्वर्ग के देवों का वैभव भी मनुष्य के पुण्य के सामने फीका है, क्योंकि देवता संयम धारण नहीं कर सकते, जबकि मनुष्य चतुर्विध संघ की सेवा करके और वैयावृत्ति व आहारदान जैसे पुण्य कर्म कर अपने जीवन को धन्य बना सकता है। सभा के प्रारंभ में व्रती श्रावक सीए अनिल जैन ने कहा कि हम तीर्थ यात्राएं अवश्य करते हैं, लेकिन नगर में विराजमान चतुर्विध संघ साक्षात चेतन तीर्थ के रूप में हमारे बीच उपस्थित हैं। मुनि महाराज को आहार देने का पुण्य कल्पनातीत होता है और यह समस्त दानों में सर्वश्रेष्ठ माना गया है। उन्होंने कहा कि सहारनपुर की धर्मपरंपरा अत्यंत गौरवशाली रही है और प्रत्येक श्रावक-श्राविका का कर्तव्य है कि संघ के लिए चैके लगाकर धर्मलाभ प्राप्त करें। इस धर्मसभा में समाज के अध्यक्ष राजेश कुमार जैन, संरक्षक राकेश जैन, सीए अनिल जैन, चै. अनुज जैन, उपचैधरी संदीप जैन, कोषाध्यक्ष अरुण जैन, नितिन जैन, अजय जैन, दीपक जैन (चूड़ी वाले), राजा जैन, आयुष जैन, चिन्मय जैन, पार्षद गौरव जैन, रविंद्र जैन, अवनीश जैन, आशीष जैन, संजीव जैन सर्राफ, पंकज जैन, संजय जैन, विपिन जैन, रमेश चंद्र जैन, ज्ञान सिंह, विनोद-आदित्य जैन, विभोर जैन, अनिल जैन मंटू, प्रवीण जैन समेत समाज के सैकड़ों श्रावक-श्राविकाएं उपस्थित रहे

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