2246 गांव ऐसे हैं, जिनका भूजल पाताल में चला गया है। 25 गांव ऐसे भी हैं, जो सेम की समस्या से जूझ रहे हैं। इनके भूजल की गहराई एक मीटर से भी कम हो गई है। जल है तो जीवन है। इसकी बूंद-बूंद बचेगी तो जीवन बचेगा। यूं कहें कि वर्तमान में नहरी पानी के साथ प्रदेश में भूजल संकट भी बढ़ रहा है। अब तक जो प्रयास किए गए हैं वे नाकाफी लगते हैं।
इन गांवों में एक फुट तक भूजल में आया सुधार
जन स्वास्थ्य विभाग, जल जीवन मिशन, थ्री पोंड, फाइव पोंड सिस्टम, लोगों में जागरूकता आदि का जरूरत अनुसार असर तो नहीं दिखा है पर फिर भी डार्क जोन वाले बाढड़ा क्षेत्र के गांव गोपी, बेरला, नीमड़ बडेसरा और लाडावास के अलावा तोशाम के गांव दांग कला, दांग खुर्द और आस पास के गांवों में भी एक फुट के लगभग भूजल में सुधार आया है।
भूजल रिचार्ज और पानी के लेवल को ऊपर लाने के लिए वर्षा के पानी को जमीन के अन्दर डालने की प्रक्रिया अपनानी होगी। इसके साथ ज्यादा से ज्यादा पुराने तालाबों की खोदाई करनी होगी। खेत का पानी खेत में और गांव का पानी गावं में नारे को साकार करने का समय है। विभाग की टीम लगातार इसके बारे में लोगों को जागरूक कर रही हैं। अशोक भाटी, जिला सलाहकार जल जीवन मिशन, भिवानी
हरियाणा के इन गांवों में भूजल की यह बनी है स्थिति
| प्रदेश में भूजल की स्थिति |
गांव |
भूजल की गहराई |
| गंभीर रूप से भूजल संकट ग्रस्त गांव |
2246 |
30 मीटर से अधिक |
| मध्यम भूजल संकट ग्रस्त गांव |
1243 |
20 से 30 मीटर तक |
| संभावित भूजल संकट ग्रस्त गांव |
1811 |
10 से 20 मीटर तक |
| संतोषजनक भूजल संकट ग्रस्त गांव |
1117 |
05 से 10 मीटर तक |
प्रदेश में सेम से प्रभावित गांव
| सेम ग्रस्त बफर जोन के गांव |
682 |
03 से 05 मीटर तक |
| सेमग्रस्त गांव |
279 |
01 से 03 मीटर तक |
| गंभीर रूप से सेमग्रस्त गांव |
25 |
01 मीटर से कम |
| भूजल प्रभावित गांवों की संख्या |
7403 |
– |
पानी की अच्छी गुणवत्ता के लिए ये पैरामीटर हैं जरूरी
| पानी |
गुणवत्ता |
| खारापन |
200 से 600 |
| क्लोराइड |
250 से 1000 |
| हार्डनेस |
300 से 600 |
| टीडीएस |
500 से 2000 |
| पीएच |
6.5 से 8.5 |
| फ्लोराइड |
1 से 1.5 |
| आयरन |
03 से 1 |
| अमोनिया |
0.5 |
| नाइट्रेट |
45 |
| फास्फेट |
0.5 |