आगरा। ‘जब मैंने यूपीएससी की तैयारी शुरू की, तो मन में जबरदस्त आत्मविश्वास था। मुझे लगता था कि मैं सब कुछ पढ़ लूंगा और आसानी से परीक्षा पास कर लूंगा, लेकिन यह ओवरकान्फिडेंस मेरे लिए भारी पड़ा। पहले दो प्रयासों में असफलता मिली, और मेरा मन पूरी तरह टूट गया। 
मैंने सोचा शायद आईएएस बनना मेरे लिए सिर्फ एक सपना ही रह जाएगा। हार मानकर मैंने तैयारी छोड़ने का फैसला कर लिया। उस मुश्किल दौर में मेरे मम्मी-पापा और दोस्तों ने मेरा हौसला बढ़ाया। उनके सहयोग ने मुझे फिर से उठने की ताकत दी।
मुझे कविताओं का शौक है, और उसी दौरान कवि अर्जुन सिसोदिया की पंक्ति ने मेरा ध्यान खींचा “युद्ध नहीं जिनके जीवन में, वे भी बड़े अभागे होंगे, या तो प्रण को तोड़ा होगा, या तो रण से भागे होंगे।” इस पंक्ति ने मेरे अंदर आग जला दी।
मैंने इसे अपनी स्टडी टेबल के सामने लगा लिया। जब भी मैं थकता या हिम्मत हारने लगता, यह पंक्ति मुझे याद दिलाती कि जंग लड़ने वाले ही विजेता बनते हैं। मैंने पूरी ताकत झोंक दी। परिवार, दोस्तों और इस पंक्ति की प्रेरणा के साथ दिन-रात मेहनत की।
आखिरकार, यूपीएससी 2024 में मुझे 38वीं रैंक मिली। यह जीत सिर्फ मेरी नहीं, बल्कि उन सभी की थी जिन्होंने मुझ पर भरोसा किया’। 
यह बातें वार्तालाप कार्यक्रम में यूपीएससी सफल अभ्यर्थी अभिषेक शर्मा ने प्रतिभागियों को बताई। दैनिक जागरण कार्यालय में हुए वार्तालाप कार्यक्रम में अभिषेक शर्मा ने अपनी सफलता की यात्रा साझा की।
दैनिक जागरण के आगरा-अलीगढ़ के संपादकीय प्रभारी अवधेश माहेश्वरी और महाप्रबंधक अखिल भटनागर ने अभिषेक और उनके पिता एके शर्मा का स्वागत किया। अभ्यर्थियों को बताया शुरुआत में सिलेबस समझने में दिक्कत होती है। इंटरनेट का सही इस्तेमाल कर टाइम टेबल बनाएं।
घंटों के हिसाब से पढ़ाई न करें, बल्कि विषय पूरा करने का लक्ष्य बनाएं। निरंतरता सबसे जरूरी है। प्रतिभागी अर्ज भटनागर ने स्ट्रेस और मोटिवेशन के बारे में पूछा।
बताया, हताशा के पलों में मैं खुद से सवाल करता था, “जीवन में क्या और क्यों जरूरी है?” मम्मी-पापा का त्याग देखकर हार मानना गलत लगा। सानवी खंडेलवाल ने करेंट अफेयर्स के बारे में पूछा, बताया स्टैटिक सवालों पर ध्यान दें, जो वर्तमान घटनाओं से जुड़े हों।
दृष्टि आईएएस अकादमी, दयालबाग शिक्षण संस्थान और डा. एमपीएस इंस्टीट्यूट के छात्रों ने भी सवाल किए। अभिषेक शर्मा ने सभी के जवाब तैयारी के दौरान किए गए अनुभव के आधार पर दिए।
उन्होंने अंत में कहा, यह सफर आसान नहीं था, लेकिन प्रेरणा, मेहनत और समर्थन ने मंजिल तक पहुंचाया। अगर सपना है, तो रण से न भागें, लड़ें और जीतें!

तैयारी की रणनीति

बताया, पहले दो प्रयासों में एक्यूरेसी पर ध्यान दिया, लेकिन प्रीलिम्स में कमी पाई कि सवाल पूरे नहीं हल कर रहा था। फिर ज्यादा से ज्यादा सवाल हल करने की आदत बनाई। मेंस में साफ राइटिंग, कम शब्दों में पूरी बात और सटीक जवाब लिखना जरूरी है। इससे परीक्षक का समय बचता है।

इंजीनियर क्यों बनते हैं आईएएस?

2022 में भोपाल एनआईटी से बीटेक करने के बाद यूपीएससी की राह अभिषेक ने चुनी। इंजीनियर हार्ड और स्मार्ट वर्क में माहिर होते हैं, यही वजह है कि सबसे ज्यादा इंजीनियर आईएएस बनते हैं।

वायुसेना का अनुभव

वर्ष 2018 में एनडीए पास किया और मायसूर में एसएसबी इंटरव्यू भी क्लियर किया, लेकिन मेडिकल कारणों से चयन नहीं हुआ।

लोगों का बदला रवैया

सफलता के बाद लोगों का व्यवहार बदल गया। जो पहले ध्यान नहीं देते थे, वे अब मददगार बन गए। यह बदलाव सिर्फ 38 वीं रैंक आने के बाद दिखा।

अभ्यर्थियों के लिए सुझाव

  • ज्यादा से ज्यादा सवाल हल करें।
  • साफ राइटिंग में कम शब्दों में जवाब लिखें।
  • करेंट अफेयर्स में स्टैटिक सवालों पर फोकस करें।
  • विषय पूरा होने पर रिवीजन करें।
  • एमसीक्यू हल करने की आदत बनाएं।
  • टाइम मैनेजमेंट करें, घंटे न गिनें।
  • कठिन विषयों के लिए ज्यादा स्टडी मटेरियल जुटाएं।

नीचे अभिषेक शर्मा के टेलीग्राम हैंडल का क्यूआर कोड दिया गया है, जिसे स्कैन कर आप उनसे डायरेक्ट अपना सवाल पूछ सकते हैं।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *