बागपत। एटीएम के 5.26 रुपये के गबन के मामले में पुलिस को कुछ और अहम जानकारी मिली है। मुख्य आरोपित गौरव तोमर व राकी मलिक की दो सिपाहियों समेत आठ और लोगों ने मदद की थी। किसी ने मोबाइल उपलब्ध कराया तो किसी ने चंडीगढ़ पुलिस से मिलीभगत कर गिरफ्तारी कराने में मदद की।
पकड़े गए चार आरोपितों से 4,62,35,160 रुपये बरामद किए गए हैं। मुख्य आरोपितों ने अपने स्वजन व रिश्तेदारों को करीब 40 लाख रुपये दे रखे हैं। इनमें उनके पिता व भाई भी शामिल हैं। पुलिस आरोपितों को गिरफ्तार कर शेष रकम बरामद करेगी।
एसपी अर्पित विजयवर्गीय ने बताया कि चंडीगढ़ डीसीसी प्रभारी इंस्पेक्टर जसमिंदर सिंह, हेड कांस्टेबल सतीश, सीनियर कांस्टेबल समुंदर के अलावा मनीष निवासी स्माल फ्लैट ईडब्ल्यूएस कालोनी चंडीगढ़ के अलावा मुख्य आरोपित गौरव तोमर व राकी मलिक को 3 अप्रैल को पांच दिन के पुलिस कस्टडी रिमांड पर लिया था।

तीन दिन में 22 एटीएम में 5.95 करोड़ रुपये जमा करने थे

गौरव तोमर व राकी मलिक ने जानकारी दी कि तीन दिन में 22 एटीएम में 5.95 करोड़ रुपये जमा करने थे। इनमें करीब 69 लाख रुपये ही जमा किए। बाकी 5,26,12,700 रुपये अपने पास रख लिए थे। रकम को दो हिस्सों में बांट लिया था। अधिकांश रकम को गौरव तोमर ने अपने घर व राकी मलिक ने अपने खेत में गड्ढा खोदकर छिपा दिया था। गौरव तोमर की निशानदेही पर 2,31,96,760 रुपये व राकी की निशानदेही पर 2,29,24,800 रुपये बरामद हुए हैं।

डीसीसी आफिस के पास से गड्ढे से 50 हजार रुपये मिले

इसी तरह मनीष की निशानदेही पर चंडीगढ़ में डीसीसी आफिस के पास से गड्ढे से 50 हजार रुपये मिले। इससे पहले राकी मलिक के गिरफ्तार किए गए भाई रोबिन उर्फ गुड्डू के पास से 63,600 रुपये बरामद हुए थे। गौरव व राकी ने पांच लाख रुपये खर्च करना और 40 लाख रुपये स्वजन व रिश्तेदारों को देने की जानकारी दी है। उनका सहयोग करने में सात-आठ और लोग शामिल रहे हैं। पुलिसकर्मी भी बताए गए हैं। जांच कर कार्रवाई की जाएगी।

चार राज्यों में काटी फरारी

पुलिस के मुताबिक घटना के बाद आरोपित गौरव तोमर व राकी मलिक एक साथ फरार हो गए थे। आरोपितों ने मौज मस्ती में पांच लाख रुपये खर्च किए। चार राज्य यूपी, दिल्ली, उत्तराखंड व चंडीगढ़ में फरारी काटी।

यह है मामला

सीएमएस कंपनी के कर्मचारी गौरव तोमर निवासी गांव आरिफपुर खेड़ी और राकी मलिक निवासी ग्राम हसनपुर एटीएम में नगदी डालने का कार्य करते थे। आरोपितों ने 5.27 करोड़ रुपये की धनराशि का गबन किया। कंपनी के प्रबंधक योगेंद्र ने आरोपितों के विरुद्ध बड़ौत कोतवाली में मुकदमा दर्ज कराया था। आरोपितों को चंडीगढ़ डीसीसी की टीम ने मिलीभगत करके तमंचे व कारतूस के साथ गिरफ्तार किया था

इसकी पोल खुलने पर चंडीगढ़ पुलिस ने डीसीसी प्रभारी इंस्पेक्टर जसमिंदर सिंह, हेड कांस्टेबल सतीश और समुंदर के अलावा मनीष निवासी चंडीगढ़ को गिरफ्तार किया था। आरोपितों को 30 मार्च को बी-वारंट पर बागपत की अदालत में पेश किया था। दो अप्रैल को अदालत से आरोपितों के पांच दिन के पीसीआर की अनुमति मिली थी।

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