मथुरा। यह सरकारी तंत्र के भ्रष्टाचार और अमानवीयता की पराकाष्ठा है। एक महिला खुद को राजस्व विभाग के दस्तावेजों में जिंदा साबित करने के लिए 29 साल तक कानूनी लड़ाई लड़ती रही, मगर मरते-मरते भी खुद को जिंदा साबित नहीं कर पाई। 19 करोड़ की जमीन को हड़पने वाले मौज में घूमते रहे। 98 वर्ष की उम्र में चल बसी अलीगढ़ की विद्या देवी की मौत के 15 दिन बाद अधिकारियों ने दो की गिरफ्तारी करवाकर मामले से पल्ला झाड़ लिया है।
डीएम चंद्रप्रकाश सिंह ने बताया कि प्रकरण संज्ञान में है। एसडीएम से पूरी जानकारी मांगी है, इसके बाद कार्यवाही की जाएगी। सुरीर कलां निवासी निद्धा सिंह ने अपनी इकलौती बेटी विद्या देवी के नाम 18 मार्च 1975 को 12.45 एकड़ भूमि की वसीयत की थी। वसीयत के लगभगत डेढ़ साल बाद निद्धा सिंह की मृत्यु हो गई।
विद्या देवी अपनी ससुराल में रहती थीं। 20 साल बाद मायके पक्ष के रिश्तेदारों ने राजस्वकर्मियों के साथ मिलकर साजिश रची। विद्या देवी को दस्तावेजों में मृत और निद्धा सिंह को जीवित दिखाते हुए फर्जी वसीयत बनवाकर 19 मई 1996 को इसे राजस्व रिकार्ड में दिनेश, सुरेश और ओमप्रकाश के नाम दर्ज करवा दिया।
कई महीने बाद विद्या देवी को इसकी भनक लगी। इसके बाद वे खुद को जिंदा और दूसरी वसीयत को फर्जी साबित करने के लिए लड़ाई शुरू की। डीएम, एसपी से लेकर थाने और तहसील कार्यालय तक भटकती रहीं। बेटे के साथ अलीगढ़ से मथुरा आतीं और अधिकारियों से खुद के जिंदा होने के सुबूत दिखातीं, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं होती।
29 साल के संघर्ष के बाद महिला आयोग और उच्चाधिकारियों के दखल के बाद एसडीएम मांट ने जांच की। विद्या देवी के बेटे सुनील के प्रार्थना पत्र पर 18 फरवरी 2025 को फर्जीवाड़े के मामले में थाना सुरीर में प्राथमिकी दर्ज हुई, लेकिन किसी को गिरफ्तार नहीं किया गया। जमीन की कीमत बढ़कर 19 करोड़ हो चुकी थी। खुद को जिंदा साबित करने में नाकाम होने के सदमे में 98 वर्ष की हो चुकी विद्यादेवी ने 18 मार्च को ससुराल अलीगढ़ के गांव बाढोन में दम तोड़ दिया।

मौत की खबर आने के बाद हुई गिरफ्तारी

विद्या देवी की मौत की खबर आने के बाद पुलिस ने दो आरोपित दिनेश और सुरेश को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है। मुकदमे के विवेचक अमित तोमर ने बताया कि जिंदा महिला को मृत दर्शाकर कूटरचित व धोखाधडी से जमीन अपने नाम राजस्व रिकार्ड में दर्ज कराने के आरोपित दिनेश और सुरेश को गिरफ्तार कर जेल भेजा जा चुका है। तीसरे आरोपित ओमप्रकाश की गिरफ्तारी का प्रयास किया जा रहा है।
विवेचना में तत्कालीन तहसीलकर्मियों सहित उनलोगों को भी चिह्नित किया जा रहा है जो इस कूटरचित दस्तावेज और फर्जीवाड़े में शामिल थे। उन्हें भी मुकदमे में आरोपित बनाया जाएगा।

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