लक्ष्मण यादव की अध्यक्षता में गठित हुई थी कमेटी
हरियाणा विधानसभा ने राज्य गीत फाइनल करने के लिए रेवाड़ी से भाजपा विधायक लक्ष्मण यादव की अध्यक्षता में कमेटी का गठन किया था।
कमेटी के पास 204 गीत पहुंचे थे। इनमें से कमेटी ने 3 गीत सिलेक्ट किए। आखिरी मंथन के बाद ‘जय जय जय हरियाणा’ गीत को फाइनल किया गया।
डॉ. बालकिशन शर्माने लिखा है गीत
राज्य गीत को पानीपत के डॉ. बालकिशन शर्मा ने लिखा है। तीन मिनट के इस गीत में 21 लाइनें हैं। इन 21 लाइनों में कुरुक्षेत्र की धरती, किसानों, खिलाडियों, सैनिकों और दूध दही के खाने का जिक्र किया गया है। इस गीत के सिंगर डॉ. श्याम शर्मा और कंपोजर पारस चोपड़ा हैं।
डॉ. श्याम शर्मा ने हरियाणा के राज्य कवि पंडित लख्मी चंद के नाम पर बनी फिल्म में भी अपनी सेवाएं दी हैं। रोहतक की मालविका पंडित ने इस गीत को निर्देशित किया है।
पहले इस गीत को बालीवुड सिंगर कैलाश खैर ने गाना था, लेकिन उनकी आवाज में हरियाणवी टच नहीं होने पर डॉ. श्याम शर्मा ने इसमें अपनी आवाज दी है। विधानसभा की कमेटी गीत को लेकर अपनी फाइनल रिपोर्ट पिछले सप्ताह दे चुकी है।
सोनीपत की लेखक ने ठोका अपना दावा
अब यह गीत विधानसभा में पेश होने से पहले सोनीपत की लेखक-अभिनेत्री गीतू परी ने इसके लिरिक्स (बोल) पर अपना दावा ठोका है। परी ने कहा कि राज्य गीत में लिखे लिरिक्स उनके गीत से मिलते-जुलते हैं। हरियाणा के लिए गर्व की बात है कि प्रदेश का अपना राज्य गीत लॉन्च हो रहा है, लेकिन गीत में लिरिक्स उनके हैं तो उन्हें भी क्रेडिट दिया जाना चाहिए।
गीतू परी ने कहा कि उन्होंने यह गीत 29 जनवरी 2024 को लिखा था। राज्यगीत का टाइटल मेरे लिखे गीत जैसा है। मैंने उसमें दो बार जय-जय लिखा था, लेकिन राज्यगीत में इसे तीन बार कर दिया गया। यह लाइन काफी मिलती-जुलती है। राज्यगीत के लिए मेरे गाने से बहुत सारे लिरिक्स उठाए गए हैं।
फतेहाबाद के कृष्ण कुमार का ये दावा
इस बीच हरियाणा के फतेहाबाद जिले के गांव ढिंगसरा निवासी कृष्ण कुमार ने भी गीत के बोल पर अपना दावा पेश करते हुए कहा कि जुलाई 2021 में उन्हें कोरोना के दौरान पता चला कि सरकार ने गीत के लिए आवेदन मांगे हैं। तब उन्होंने गीत की रचना कर सरकार द्वारा बताई गई साइट पर मेल कर दिया।
2023 में पता चला कि तीन गीतों को फाइनल किया गया, जिसमें जय, जय हरियाणा भी शामिल है। इसके बाद 26 जनवरी 2024 को राजपथ पर हरियाणा की झांकी में उनके गीत की धुन बजाई गई। कृष्ण कुमार के अनुसार कुछ दिन पहले पता चला कि गीत का रचनाकार कोई और बताया जा रहा है।
इसके बाद उन्होंने आरटीआई लगाई जिसका कोई जवाब नहीं मिला। मुख्यमंत्री को भी शिकायत भेजी गई। कृष्ण के अनुसार उन्होंने हरियाणवी भाषा में गीत लिखा था जिसका हिंदी में रूपांतरण कर दिया गया है। कृष्ण कुमार ने दावा किया कि 80 प्रतिशत गीत उनका ही लिखा हुआ है।
उन्हें इसका क्रेडिट नहीं मिला है। एक गीत पर दो अन्य कलाकारों के दावे के बाद विधानसभा की कमेटी के पास अब इस गीत को लेकर असमंजस पैदा हो गया है।

