बीते दो सालों से जीटी रोड की मरम्मत का कार्य नहीं हुआ है। गड्ढों के चलते यहां पर आए दिन राहगीरों को दर्द से गुजरना पड़ रहा है। पीडब्ल्यूडी के इंजीनियरों ने जीटी रोड के गड्ढों में मिट्टी और गिट्टी जगह मलबे से निकली टूटी ईंटों को डालना शुरू कर दिया है। यह राहगीरों को लिए और खतरनाक बन गया है।
अधिशासी अभियंता बोले एक माह का अभी लगेगा वक्त
सड़क परिवहन मंत्रालय से जीटी रोड के साथ ही हरदोई, उन्नाव, कन्नौज जिले की 53 किमी रोड का निर्माण करने के लिए एक साथ लगभग 70 करोड़ रुपये का टेंडर निकाला गया है। इस टेंडर को लेने के लिए पांच फर्मों ने आवेदन किया था, लेकिन तकनीकी खामियों के चलते टेंडर प्रक्रिया फाइनल नहीं हो सकी। अब मंत्रालय की ओर से रीटेंडरिंग की कार्रवाई हो रही है। पीडब्ल्यूडी के अधिशासी अभियंता अरूण कुमार जयंत ने बताया कि रीटेंडरिंग की प्रक्रिया पूरी होने में लगभग एक माह का और वक्त लग सकता है। ऐसे में बड़े गड्ढों को मलबे से भराया जा रहा है।
ये हैं जिम्मेदार
- 2015 विनोद कुमार सिंह अधिशासी अभियंता
- 2017 सत्य प्रकाश सिंह अधिशासी अभियंता
- 2018 शिवप्रकाश ओझा अधिशासी अभियंता
- 2021 एसपी ओझा अधिशासी अभियंता
- 2022 अवधेश कुमार सिंह अधिशासी अभियंता
- 2024-25 अरुण कुमार जयंत अधिशासी अभियंता
21 किमी की सड़क, 1680 छोटे-बड़े गड्ढे
बीती 17 फरवरी को दैनिक जागरण की टीम ने जीटी रोड का निरीक्षण का किया था। इस दौरान आइआइटी से रामादेवी तक 21 किमी लंबी में सड़क पर 1680 छोटे-बड़े गड्ढे मिले थे। रोड पर करीब 50 ऐसे गड्ढे थे, जो काफी बड़े और गहरे थे। वहीं कल्याणपुर क्रासिंग, आवास-विकास कार्यालय क्रासिंग, विश्वविद्यालय, गीता नगर मेट्रो स्टेशन के आसपास इतने बड़े गड्ढे बन चुके हैं, जिनके अंदर वाहनों के चारों पहिए ही समा जाते हैं।
गुरुदेव चौराहा, रावतपुर और कार्डियोलाजी के सामने सड़क पूरी तरह से ध्वस्त हो चुकी है। जरीब चौकी से सीओडी पुल तक कई ऐसे गड्ढे बन चुके हैं, जिनके बाइक सवार गिरकर चोटिल हो रहे हैं। बीते दिनों सीओडी पुल के ऊपर तीन फीट का गहरा गड्ढा बन गया था, इंजीनियरों ने मिट्टी डालकर बंद किया था।

