इसके बाद ही वेंडर नई जगह पर जाएंगे। वेंडर अपना काम पहले की तरह करते रहें, यह व्यवस्था सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं। पुलिस अधिकारी भी कोई भी एक्शन लेने से पहले मंडल आयुक्त और नगर आयुक्त से बात करेंगे। इसके बाद टाउन वेल्डिंग की कमेटी जो तय करेगी और आगे की स्थिति बनने तक साप्ताहिक बाजार जैसे लग रहा था, वैसे ही लगता रहेगा।
100 मीटर से तीन किलोमीटर तक बढ़ा दायरा
विजय नगर के मुख्य मार्ग पर 100 मीटर में साप्ताहिक बाजार लगना शुरू हुआ था। अब इसका दायर तीन किलोमीटर बढ़ गया था। हर सप्ताह दुकानों में इजाफा होता रहा। इसी तरह संजय नगर, नंदग्राम, शालीमार गार्डन, इंदिरापुरम, वसुंधरा, वैशाली आदि स्थानों पर लगने वाले बाजार भी 10 से 20 दुकानों से शुरू हुए थे, जो बाद में कई किलोमीटर के दायरे में फैल गए। इनमें दिल्ली से आने वाले व्यापारियों की खासी संख्या है।
क्या बोले स्थानी लोग?
स्थानीय लोगों का कहना है कि विजय नगर में 26 वर्ष पहले 100 मीटर में कुछ लोगों ने शुरुआत में सड़क के किनारे बाजार लगाया गया था। जब दुकानें बढ़नी शुरू हो गई तो जगह कम पड़ने लगी।
व्यापारियों ने सड़क पर दुकान लगानी शुरू कर दीं। बाद एक सड़क को पूरी तरह बंद कर दिया। नंदग्राम में 20 वर्ष पहले 10 लोगों ने दुकान लगाई थीं। इनकी संख्या बढ़कर एक हजार से अधिक हो गई थीं।
संजय नगर में 23 वर्ष पहले मुख्य मार्ग पर 20 से 25 दुकानदार द्वारा बाजार लगना शुरू किया था। बाद में यहां दो किलोमीटर के दायरे में बाजार फैल गया। लोगों ने संकरी गलियों तक में दुकानें लगा दीं। अब सड़क से दुकान हटाने का कुछ लोग विरोध कर रहे हैं तो कुछ इसके पक्ष में है।
ठेकेदारों में रहता है वर्चस्व का तनाव
साप्ताहिक बाजार के एक व्यापारी ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि का कई ठेकेदारों ने व्यापारियों को बाजार में तखत, पानी, लाइट की सुविधा उपलब्ध कराने की एवज में लाखों रुपये कमाने का कारोबार फैला रखा है।
साप्ताहिक बाजार इस कारोबार में अपना वर्चस्व कायम रखने के लिए ठेकेदार एक दूसरे लड़ते रहते हैं। दुकानदारों का दावा है कि उनसे दुकान लगाने के बदले में पैसे भी लिए जाते हैं।हालांकि पैसे लेने का उनके पास कोई सबूत नहीं मिला।
साप्ताहिक बाजार से फायदा
लोगों को रोजगार मिल रहा है, घर के नजदीक सामान मिल जाता है, स्थायी दुकानों की अपेक्षा सस्ता सामान मिलता है, एक ही स्थान सब्जी, फल, कपड़े आदि रोजमर्रा का सामान मिल जाता है।
साप्ताहिक बाजार से नुकसान
जाम लगता है, एंबुलेंस फंस जाती है, स्कूल की बस नहीं आ पाती, वाहन लेकर न निकल पाते, बांस-बल्ली लगाने से सड़क क्षतिग्रस्त होती, गंदगी फैलती है, प्रतिबंधित पालीथिन अधिक प्रयोग होता है।

