पानीपत। लेबर रूम रविवार रात साढ़े 11 बजे। परिजन डिलीवरी के इंतजार में बाहर बैठे थे। कुछ ही देर में लेबर रूम के अंदर से आवाज आई, प्रिया के साथ…। उत्साह के साथ सास शीला दौड़कर पहुंची। स्टाफ नर्स ने कहा, बधाई हो…बेटी हुई है, यह कहकर गोद में डाल दिया।

बच्ची की हालत ठीक नहीं थी, नर्स ने कहा, माता जी। चौथी मंजिल पर एसएनसीयू में दाखिल करवा दो। शीला ने बच्ची को एसएनसीयू में दाखिल करवा दिया। वहां से वापस लेबर रूम में आकर बहू का हाल जानने के लिए पहुंची तो बहू डिलीवरी के इंतजार में खड़ी थी।

बहू को देख सास बोली, यहां खड़ी क्या कर रही हो, बोली अभी ऑपरेशन का नंबर नहीं आया, यह सुनकर सास के होश उड़ गए। बोली-जो बच्ची मुझे दी है फिर वो किसकी है।

लेबर रूम में मच गया हंगामा

इस घटना के बाद लेबर रूम में हंगामा हो गया। बिना डिलीवरी ही गोद में बच्ची सौंपने का मामला जब तूल पकड़ने लगा तो लेबर रूम के स्टाफ में भगदड़ मच गई। स्टाफ के सदस्यों ने माफी मांगी, कहा गलती से फाइल बदल गई, हंगामा न करें।

जिनको बच्ची सौंपी, उन्हीं की फाइल कर दी थी गुम

लेबर रूम में जिनको बच्ची सौंप दी थी, उन्हीं की फाइल गुम कर दी गई। स्टाफ से स्वजन ने पूछा तो सीधे मुंह जवाब नहीं दिया। बोले-वहां फाइलें पड़ी हैं ढूंढ लो। दो घंटे की मशक्कत के बाद फाइल मिली, तब जाकर महिला की डिलीवरी के लिए प्रोसेस शुरू हो पाया।

पहले रिश्तेदारों को बोला बेटी हुई, आधे घंटे बाद बताया नहीं बेटी नहीं बेटा हुआ लेबर रूम स्टाफ ने जब सास शीला देवी को बच्ची सौंपी तो उन्होंने इसकी सूचना परिवार के सदस्यों के अलावा रिश्तेदारों को भी दे दी, कि पौत्री हुई है। लेकिन घटनाक्रम के बाद जब डिलीवरी हुई तो उनको बेटा हुआ।

स्वजनों ने फिर से रिश्तेदारों को कॉल लगाई। बोले-बेटी नहीं जी बेटा हुआ है। दूसरी तरफ से जवाब आया, क्या हुआ, कभी बेटी हुई है कभी बेटा, मामला क्या है। हर कॉल पर वह घटनाक्रम के बारे में रिश्तेदारों व नजदीकियों को समझाते नजर आए।

ये सवाल जो व्यवस्था पर खड़ा कर रहे सवाल

  • जिस प्रकार से रविवार रात को बच्चा किसी ओर को सौंप देने की घटना सामने आई है, उससे संभव है कि नार्मल डिलीवरी होती तो बच्चा बदला भी जा सकता था। इस लापरवाही के लिए जिम्मेदार कौन है?
  • मरीजों की फाइल गुम होने की कई घटनाएं सामने आ चुकी हैं, इनको व्यवस्थित रखने की जिम्मेदारी किसकी है?
  • बिना पूछताछ ही किसी को भी बच्चा ऐसे कैसे स्टाफ ने सौंप दिया?

मामला गंभीर, क्योंकि जिले में बच्चा बदलने की घटनाएं हो चुकीं

सरकारी अस्पताल हो या फिर प्राइवेट इस प्रकार की लापरवाही बेहद गंभीर है, क्योंकि बच्चे बदलने के आरोप पहले डिलीवरी हटों में लगते रहे हैं। इस प्रकार के मामले जिला प्रशासन के पास भी कई बार जा चुके हैं।

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