साइबर क्राइम का बड़ा भंडाफोड़: 85 करोड़ के संदिग्ध ट्रांजेक्शन, 50 हजार का इनामी समेत तीन गिरफ्तार

असलम त्यागी

मुज़फ्फरनगर जनपद की थाना साइबर क्राइम पुलिस ने ‘डिजिटल अरेस्ट’ के नाम पर संगठित ऑनलाइन ठगी करने वाले एक अंतरराज्यीय गिरोह का पर्दाफाश करते हुए 50 हजार रुपये के इनामी अपराधी समेत तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया है। जांच में करीब 85 करोड़ रुपये के संदिग्ध लेनदेन का खुलासा हुआ है। संबंधित बैंक खातों के खिलाफ देशभर में लगभग 70 शिकायतें दर्ज बताई गई हैं।

‘प्रतिबिंब’ पोर्टल से मिला सुराग

एसपी क्राइम इंदु प्रकाश के अनुसार, गृह मंत्रालय के गृह मंत्रालय के पोर्टल प्रतिबिंब पोर्टल पर प्राप्त शिकायतों तथा 4.4 करोड़ रुपये की ठगी के एक मामले की जांच के दौरान ट्रांजेक्शन ट्रेसिंग से मुजफ्फरनगर स्थित बैंक खातों का लिंक सामने आया।

तकनीकी विश्लेषण और फाइनेंशियल ट्रेल के आधार पर आरोपियों की पहचान कर उन्हें गिरफ्तार किया गया।

ऐसे चलता था ‘डिजिटल अरेस्ट’ मॉड्यूल

पुलिस के मुताबिक, आरोपी खुद को जांच एजेंसियों या कानून प्रवर्तन से जुड़ा बताकर पीड़ितों को ‘डिजिटल अरेस्ट’ की धमकी देते थे। डर और मानसिक दबाव बनाकर उनसे मोटी रकम ट्रांसफर करवाई जाती थी।

वसूली गई धनराशि को म्यूल बैंक खातों में मंगाकर तुरंत क्रिप्टो करेंसी (यूएसडीटी) में परिवर्तित कर दिया जाता था, जिससे ट्रैकिंग प्रक्रिया जटिल हो जाती थी और रकम विदेश तक ट्रांसफर होने की आशंका जताई जा रही है।

आरोपी और बरामदगी गिरफ्तार आरोपियों में—

दीम पुत्र मेहरबान, निवासी कुटेसरा, थाना चरथावल

गुफरान पुत्र मुस्तफा, निवासी कुटेसरा, थाना चरथावल

मयूर अफजल राणा, निवासी सुजडू, मुज़फ्फरनगर

पुलिस के अनुसार नदीम और गुफरान पहले सिलाई का कार्य करते थे, लेकिन बाद में कमीशन के आधार पर बैंक खाते उपलब्ध कराने लगे। मयूर अफजल राणा कथित रूप से ठगी की रकम को यूएसडीटी में परिवर्तित करता था।
पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से दो मोबाइल फोन, एक चेकबुक और एक डायरी बरामद की है। डायरी में लेन-देन से जुड़े महत्वपूर्ण विवरण दर्ज होने की बात कही गई है। पिछले दो महीनों में लगभग 30 लाख रुपये के ताजा ट्रांजेक्शन भी जांच में सामने आए हैं।

विधिक कार्रवाई और अपील
एसएसपी संजय कुमार वर्मा के निर्देशन में हुई इस कार्रवाई में आरोपियों के खिलाफ बीएनएस एवं आईटी एक्ट की संबंधित धाराओं में मुकदमा दर्ज कर न्यायालय में पेश किया गया।
पुलिस ने आमजन से अपील की है कि किसी भी प्रकार की ‘डिजिटल अरेस्ट’, वीडियो कॉल धमकी या सरकारी एजेंसी के नाम पर आने वाली संदिग्ध कॉल से न डरें। ऐसी स्थिति में तुरंत साइबर हेल्पलाइन 1930 पर शिकायत दर्ज कराएं या नजदीकी थाने से संपर्क करें।

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