शरद द्विवेदी। सनातन धर्म के वैभव का प्रतीक महाकुंभ सामाजिक समरसता का संदेश देगा। संगम तीरे वंचित समाज के लोग महामंडेश्वर जैसे सम्मानित पद को सुशोभित करेंगे। मतांतरण रोकने, सामाजिक समसरता कायम करने के लिए वंचित समाज के 71 लोगों को जूना अखाड़ा महामंडलेश्वर की उपाधि देगा।
अनुसूचित जाति के प्रथम जगदगुरु स्वामी महेंद्रानंद गिरि के निर्देशन में सबका प्रशिक्षण चल रहा है। महामंडलेश्वर की उपाधि पाने वालों ने दो-तीन वर्ष पहले अखाड़े से जुड़कर संन्यास लिया था। सनातन धर्म व अखाड़े के प्रति निष्ठा-समर्पण देखकर उन्हें महामंडलेश्वर बनाया जाएगा।

