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हिंदी की समरसता में सबको जोड़ने की शक्ति: सुरेखा डंगवाल हिंदी दिवस कार्यक्रम की

Shareदेहरादून। हिंदी विश्व की समृद्धतम भाषाओं में एक है। हिंदी में ही वो समरसता है जो सबको जोडने की ताकत रखती है। शनिवार को भाषा संस्थान के हिंदी दिवस कार्यक्रम में मुख्य वक्ता के रूप में दून विश्वविद्यालय की कुलपति डॉ. सुरेखा डंगवाल ने हिंदी के गौरव का बखान किया। उन्होंने कहा कि आज अंग्रेजी के प्रति मोह की वजह अंग्रेजी औपनिवेशवाद भी एक बड़ी वजह है। इस औपनिवेशवाद की वजह से लोगों को लगने लगा कि भविष्य अंग्रेजी में ही है। लेकिन ऐसा नहीं है। यदि इतिहास को देखा जाए तो अंग्रेजी का विकास 14 वीं शताब्दी से शुरू हुआ है। इसमें फ्रेंच व कुछ अन्य भाषाओं के शब्दों को शामिल करते हुए नया रूप दिया गया। अंग्रेजी के कुछ शब्दों के उदाहरण देते हुए उन्होंने इसे लैंगिक विभेद करने वाली भी बताया। अंग्रेजी में खासकर स्त्रियों के लिए प्रयोग होने वाले शब्दों की डॉ. डंगवाल ने बारीकी से व्याख्या करते हुए हिंदी की समृद्धता पर रोशनी डाली। कहा कि यह देखना होगा कि दूसरी भाषाओं की वजह से लोक भाषाएं के विकास पर असर न पड़ने पाए। भाषा ही संस्कृति का मूल है। अपनी भाषा ही वो भाव ला सकती है, जिसे कोई व्यक्ति अंर्तमन के भावों को प्रदर्शित कर सकता है।
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