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उत्तराखंड में प्राकृतिक आपदाओं से प्रभावित परिवारों के पुनर्वास की प्रकिया और सरल एवं प्रभावी बनाई जाएगी। आपदा प्रबंधन विभाग ने वर्तमान में लागू पुनर्वास नीति-2021 के कुछ मानकों में बदलाव करके सहायता राशि को दोगुना तक बढ़ाने का प्रस्ताव तैयार किया है।

उत्तराखंड में अब आपदा पीड़ित परिवारों के पुनर्वास के लिए आर्थिक मदद होगी दोगुनी, धामी सरकार का क्या प्लान
Praveen Sharma हिन्दुस्तान, देहरादून। चंद्रशेखर बुड़ाकोटीSat, 14 Sep 2024 03:37 AM
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उत्तराखंड में प्राकृतिक आपदाओं से प्रभावित परिवारों के पुनर्वास की प्रकिया और सरल एवं प्रभावी बनाई जाएगी। आपदा प्रबंधन विभाग ने वर्तमान में लागू पुनर्वास नीति-2021 के कुछ मानकों में बदलाव करके सहायता राशि को दोगुना तक बढ़ाने का प्रस्ताव तैयार किया है। वित्त विभाग के निर्देश पर सभी डीएम से उनके सुझाव मांगे गए हैं।

आपदा प्रबंधन विभाग के संयुक्त सचिव वीएस यादव ने कुछ समय पहले ही सभी डीएम को संशोधित प्रस्तावों का ड्राफ्ट भेजा है। कुछ जिलों ने अपने सुझाव भेजे हैं। सूत्रों के अनुसार सीएम पुष्कर धामी के निर्देश पर आपदा प्रबंधन विभाग कई माह से इस नीति पर मशक्कत कर रहा है। सीएम का कहना है कि आपदा प्रभावितों के पुनर्वास और आवास, रोजगार आदि के लिए सरकार से जितना ज्यादा से ज्यादा हो पाएगा, उतनी मदद का प्रयास होगा। वित्त विभाग ने प्रस्ताव पर आपत्तियां लगाई थीं। इसके तहत जिला स्तर पर नए सुझाव भी लिए जा रहे हैं।

विस्थापन भत्ता और स्वरोजगार सहायता दोगुनी से ज्यादा

पुनर्वास नीति में विस्थापन भत्ते और स्वरोजगार के लिए आर्थिक सहायता का भी प्रावधान है। संशोधित प्रस्ताव में विस्थापन भत्ते को 10 हजार से बढ़ाकर 15 हजार रुपये करने की सिफारिश की गई है। जबकि, विस्थापित होने वाले ग्रामीण दस्तकारों को नए स्थान पर अपना कारोबार शुरू करने के लिए वर्तमान में 25 हजार रुपये देने का प्रावधान है। इसे बढ़ाकर 50 हजार रुपये करने का प्रस्ताव है।

यह बदलाव है प्रस्तावित

● प्रभावित परिवारों के पुनर्वास को हर जिले में राजस्व विभाग,पंचायत, वन भूमि का लैंड बैंक बनाया जाएगा

● आपदा प्रभावित दूसरे जिले में स्वयं जमीन खरीद कर विस्थापित होना चाहते हैं तो जिलाधिकारी को जमीन के साक्ष्य देने होंगे

● भवन निर्माण को एसडीआरएफ के मानक के अलावा चार के बजाय सात लाख रुपये अतिरिक्त मदद

● कृषि भूमि के बजाए बंजर भूमि दिए जाने पर उसके विकास के लिए प्रति हेक्टेयर 15 हजार रुपये के बजाए 25 हजार रुपये सहायता

● खेती और बोझा ढोने वाले पशुओं की गोशाला के लिए 15 हजार के बजाए 20 हजार की सहायता

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