आजादी के बाद देश के उस सबसे शक्तिशाली राज परिवार जिनकी बगैर मर्जी के पत्ता नहीं हिलता था, केंद्रीय मंत्रियों से लेकर अलग अलग सूबे के मुख्यमंत्री, राज्यपाल तक उनसे मिलने के लिए दिल्ली में डेरा जमाए रहते थे और कई बिना मिले मायूस होकर लौट जाते थे। कभी लोगों ने सोचा भी नहीं होगा कि उन्हें कभी बस में, कभी सैलून में, कभी आम सड़क पर, कभी दलित के यहां, कभी बैंक की लाइन में, कभी ट्रेन में, कभी खेत में नंगे पांव चलते हुए देखा जाएगा। कहते हैं घमंड किसी का नहीं रहता, ताकत किसी की नहीं रहती, समय के साथ सब जर्जर होता जाता है। इसकी सबसे बड़ी बानगी गांधी परिवार है, हालांकि वह गांधी थे नहीं, मगर गांधी नाम भुनाया बहुत। और इतनी शक्तिशाली परिवार को जमीन में स्तर पर लाने वाला व्यक्ति एक आम सा चाय वाला था, यह भी इतिहास में हमेशा दर्ज रहेगा।

विकास बालियान, लेखक, पत्रकार, हरियावनी फिल्मों के अभिनेता,

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