गन्ना भाव ₹400 तक पहुंचा — 13 साल बाद पूरी हुई किसानों की मांग, लेकिन खुशी अधूरी
✍️ विकास बालियान, प्रधान संपादक — कृषि नज़र
लखनऊ/मुजफ्फरनगर।
उत्तर प्रदेश सरकार ने गन्ने के दाम में ₹30 प्रति क्विंटल की बढ़ोतरी कर किसानों को बड़ी राहत दी है। 2025–26 पेराई सत्र के लिए अगेती किस्म का भाव अब ₹400 प्रति क्विंटल तय किया गया है। यह वही आंकड़ा है जिसका इंतज़ार प्रदेश के गन्ना किसानों को पिछले 13 वर्षों से था।
हालांकि राहत के साथ सवाल भी उठ खड़े हुए हैं — क्या किसानों को भुगतान समय पर मिलेगा?
🟢 हरियाणा अब भी आगे
जहां योगी सरकार ने 400 रुपये का भाव घोषित किया है, वहीं हरियाणा ₹415 प्रति क्विंटल पर कायम है, जो देश में सबसे अधिक है। यूपी के किसानों को अब भी हरियाणा से ₹15 कम मिल रहे हैं।
📊 पिछले 15 सालों का गन्ना भाव इतिहास
- 2011 (बसपा सरकार) – ₹250/क्विंटल
- 2012 (सपा सरकार) – ₹40 की ऐतिहासिक बढ़ोतरी, ₹290 से ₹330/क्विंटल
- 2016–17 – ₹25 की बढ़ोतरी
- 2017 (योगी सरकार) – ₹10 बढ़ाकर ₹315
- 2018 – ₹325
- 2019 – ₹335
- 2021 (किसान आंदोलन के बाद) – ₹350
- 2023 – ₹370
- 2024 – कोई बढ़ोतरी नहीं
- 2025 (अब) – ₹30 की वृद्धि, ₹400/क्विंटल
इस तरह 13 साल में योगी सरकार के कार्यकाल के दौरान कुल ₹95 प्रति क्विंटल की वृद्धि हुई है, जबकि एकमुश्त सबसे बड़ी बढ़ोतरी अभी भी अखिलेश यादव सरकार के ₹40/क्विंटल की ही है।
💬 किसान नेताओं की प्रतिक्रिया
राष्ट्रीय किसान मजदूर संगठन के राष्ट्रीय अध्यक्ष सरदार वी.एम. सिंह ने कहा,
“गन्ने का भाव ₹500 होना चाहिए और भुगतान में देरी पर ब्याज तत्काल मिलना चाहिए।”
वहीं भारतीय किसान यूनियन (टिकैत) के प्रवक्ता राकेश टिकैत बोले,
“बढ़ोतरी स्वागतयोग्य है, पर भुगतान समय से होना ज़रूरी है। खाद, बिजली, डीज़ल महंगा है — ₹500 कुंतल से कम लाभकारी नहीं।”
⚙️ भुगतान में सबसे बड़ी चुनौती
राज्य की कई मिलें — जैसे सिंभावली शुगर मिल और बजाज समूह की इकाइयाँ — भुगतान में महीनों की देरी के लिए बदनाम हैं।
अगर समय पर भुगतान नहीं हुआ, तो ₹400 का भाव किसानों के लिए सिर्फ एक “काग़ज़ी जीत” बन जाएगा।
🏛 राजनीतिक मायने
गन्ना भाव में यह बढ़ोतरी स्पष्ट रूप से रालोद–भाजपा गठबंधन के दबाव का परिणाम मानी जा रही है।
पश्चिमी यूपी की गन्ना बेल्ट में रालोद की राजनीतिक पकड़ के कारण सरकार पर दबाव बना, जिससे किसानों को यह राहत मिली।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह फैसला 2027 के विधानसभा चुनावों से पहले भाजपा के लिए बड़ा “किसान संदेश” साबित हो सकता है।
🔍 आगे की राह
अगर भुगतान समय पर हुआ और एथेनॉल नीति में सुधार हुए, तो गन्ना फिर “नकदी फसल” के रूप में किसानों की पहली पसंद बन सकता है।
लेकिन जब तक मिलों पर सख्त कार्रवाई और ब्याज सहित बकाया भुगतान सुनिश्चित नहीं किया जाता, तब तक यह बढ़ोतरी अधूरी ही मानी जाएग
✍️ विकास बालियान
(प्रधान संपादक – कृषि नज़र)

