हाल ही में विपक्ष की बैठक बेंगलुरु में संपन्न हुई । उस बैठक के माध्यम से कई विपक्षी दल एक होने की हुंकार भर रहे हैं। ऐसे दल जिनकी विचारधारा मेल नहीं खाती जो अपने ही राज्य में हाल ही के चुनाव में एक-दूसरे के खिलाफ लड़ रहे थे वह सभी एक होकर अखंड भारत के विरुद्ध इंडिया का नाम देते हुए 2024 का चुनाव जीतने की ओर बढ़ रहे हैं। इसी प्रकार से 2019 में भी हमने देखा कि कई विपक्षी दल एकता दिखाने में कोई कसर नहीं छोड़ी और जब सीटों का बंटवारा हुआ तो उस बंटवारे में एकता नहीं दिखी और वह विपक्ष तार-तार हो गया। इसी प्रकार से देश के अंदर विभिन्न राज्यों के मुख्यमंत्री विपक्षी दल की एकता बैठक में पहुंचे जो कि केंद्रीय सत्ता पक्ष के विरुद्ध मोर्चा खोलना चाहते हैं परंतु क्या उन्हें इस बात का पूर्ण भरोसा है कि वह सत्ता में आएंगे या नहीं आएंगे। विपक्षी दलों ने पहले ही हार मान ली है इसलिए अपनी एकता को अमलीजामा पहनाने के लिए उसका नाम इंडिया रख दिया है। एक ऐसा संगठन बनकर तैयार किया है जो केरल से कश्मीर तक राजस्थान से पूर्वोत्तर भारत के सुदूर छोर पर स्थित अरुणाचल प्रदेश तक आपस में ही एक दूसरे के विपरीत सालों से लड़ते आ रहे हैं। हालांकि विपक्ष ने जिस प्रकार की हुंकार भरी है मुझे नहीं लगता कि जब सीटों का बंटवारा होगा तो कांग्रेस जो इनकी प्रमुख दल है वह यह बोल देगी कि केरल में हम चुनाव नहीं लड़ेंगे ,बंगाल में हम चुनाव नहीं लड़ेंगे ,दिल्ली में हम चुनाव नहीं लड़ेंगे ,पंजाब में हम चुनाव नहीं लड़ेंगे, कश्मीर और जम्मू में हम चुनाव नहीं लड़ेंगे और लड़ेंगे तो कितनी सीटों पर लड़ेंगे यह भी एक बड़ा विषय है।
विपक्षी एकता में प्रश्न तब उठता है जब हम देखते हैं कि यह वही ममता बनर्जी है जो विपक्षी एकता बैठक में मंच में खड़ी होकर बोलती है कि 9 साल से लोकतंत्र की हत्या हुई है लोकतंत्र को खरीद लिया गया है परंतु वही 2019 के चुनाव में उनके ही राज्य में सत्तापक्ष दल 19 सीटें प्राप्त करी थी और दूसरी तरफ हाल ही में हुए ग्राम पंचायत एवं ग्रामीण क्षेत्रों से पंचायती चुनाव जो हुए उसमें तृणमूल कांग्रेस के द्वारा लोकतंत्र की हत्या संपूर्ण देशवासियों ने देखी किस प्रकार से बैलेट पेपर को पानी में फेंका गया बैलेट पेपर के साथ में लूटपाट की गई बैलेट पेपर को जलाने की कोशिश की गई उसके साथ साथ एक बाहुबली के द्वारा लोगों को बूथ के अंदर खड़े होकर वोट ना करने और स्वयं उसका वोट डालने का अधिकार प्राप्त हुआ इन सभी की वीडियोग्राफी हो चुकी है और पूरा देश देख चुका है तो किस प्रकार ममता बनर्जी है कहती है कि लोकतंत्र की हत्या केवल सत्तापक्ष कर रहा है बंगाल में इस बार के पंचायती चुनाव में जितनी हत्याएं हुई है उतनी हत्याएं कम्युनिस्ट काल में भी नहीं हुई है अब बात करते हैं दूसरी दल दूसरा दल कम्युनिस्ट पार्टी जो केरल में खुल्लम-खुल्ला कांग्रेस के खिलाफ लड़ती है और आज बेंगलुरु में एकता का सूत्रधार बन रही है क्या केरल में कांग्रेस एक भी सीट पर नहीं लड़ेगी क्या पूरे देश भर में 500 सीटों में लड़ने वाली कांग्रेस आज 100 सीटों में ही लड़ेगी यह केवल कांग्रेस मुक्त भारत की ओर बढ़ती विपक्षी एकता सबके सामने आ चुकी है यह सब को प्राप्त हो चुका है कि कांग्रेस मुक्त भारत बनाना है इसीलिए विपक्षी एकता में नितेश जिन्होंने बिहार में एक भी उद्योग स्थापित नहीं किया बिहार जैसी उपजाऊ भूमि को जिसमें कई विकास के कार्य हो सकते थे कई कृषि संबंधित उद्योग लग सकते थे परंतु नहीं लगाया जिससे आज बिहार के लोग अन्य राज्यों में जाकर काम करने के लिए मजबूर हैं क्या वह इन सब का साथ देंगे। बात जब सत्ता पक्ष की की जाती है तो सत्ता पक्ष में 26 दलों के साथ जो बैठक हुई है उन सभी दलों में कोई भी दल इतना मजबूत नहीं है कि लोकसभा के अंदर सत्ता पक्ष के दल का मुकाबला कर सके परंतु आज छोटे-छोटे दलों को भी इतना सम्मान दिया जा रहा है क्योंकि इन 9 सालों में इन दलों ने एकता का सूत्र बांधा और साथ-साथ चले हैं सभी को सम्मान मिला है विश्वास का अनूठा उदाहरण इन दलों के द्वारा दिया गया है उन सभी को यशस्वी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी की कार्यशैली पर विश्वास है भरोसा है तो यह भरोसे का संगठन है और वहीं दूसरी तरफ सत्ता में आने की लालच है कपट है बरहाल यह तो 2024 के चुनाव जितने नजदीक आएंगे और विपक्षी दल के द्वारा जो इंडिया नाम निकाला गया है जब इसमें सीटों का बंटवारा होगा तो क्या यह इंडिया एलाइंस रहेगा या नहीं रहेगा यह देखने की बात होगी।
लेखक=राष्ट्रीय राजधानी कार्यालय व्यवस्था प्रमुख सहकार भारती

