’83 सीटों का रिमोट हमारे हाथ’, रामनगर से अरविंद राजभर ने फूंका 2027 चुनाव का बिगुल
सोभित शुक्ला
बाराबंकी। उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 में अभी समय है, लेकिन राजनीतिक दलों ने अपनी रणनीति को अंतिम रूप देना शुरू कर दिया है। इसी क्रम में मंगलवार को बाराबंकी जिले की रामनगर विधानसभा क्षेत्र में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी (सुभासपा) के राष्ट्रीय प्रधान महासचिव एवं पार्टी अध्यक्ष ओमप्रकाश राजभर के पुत्र डॉ. अरविंद राजभर ने कई अहम राजनीतिक दावे और बयान देकर पूर्वांचल की सियासत का पारा बढ़ा दिया।
रामनगर के ब्लॉक प्रमुख संजय तिवारी के आवास पर कार्यकर्ताओं और पदाधिकारियों को संबोधित करते हुए डॉ. अरविंद राजभर ने कहा कि पूर्वांचल की 83 विधानसभा सीटों पर सुभासपा का प्रभाव निर्णायक है। उन्होंने दावा किया कि इन सीटों पर राजनीतिक समीकरण बदलने की क्षमता उनकी पार्टी के पास है। उन्होंने कहा कि वर्ष 2017 में जब सुभासपा राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) के साथ थी, तब गठबंधन को इन क्षेत्रों में बड़ी सफलता मिली थी। वहीं वर्ष 2022 में समाजवादी पार्टी के साथ चुनाव लड़ने पर इन सीटों का राजनीतिक रुझान अलग दिशा में गया। उनका कहना था कि वर्ष 2027 में एनडीए के साथ मिलकर फिर से बहुमत की सरकार बनाने का लक्ष्य तय किया गया है।
रामनगर विधानसभा सीट पर मजबूत दावेदारी
डॉ. अरविंद राजभर ने कहा कि रामनगर विधानसभा सीट लंबे समय से सुभासपा की प्राथमिकता रही है। उन्होंने बताया कि पिछले चुनावों में गठबंधन की परिस्थितियों के कारण यह सीट पार्टी के हिस्से में नहीं आ सकी, लेकिन इस बार कार्यकर्ताओं की भावना और संगठन की रणनीति दोनों इस बात के पक्ष में हैं कि यहां से सुभासपा अपना उम्मीदवार मैदान में उतारे।
उन्होंने कहा कि पार्टी ने कई जिलों में अपनी चुनावी दावेदारी सीमित रखते हुए रामनगर जैसी महत्वपूर्ण सीटों पर पूरा ध्यान केंद्रित करने का निर्णय लिया है। इस संबंध में भाजपा नेतृत्व के साथ भी चर्चा की जा चुकी है और उन्हें सकारात्मक परिणाम मिलने की उम्मीद है।
समाजवादी पार्टी पर बोला हमला
समाजवादी पार्टी द्वारा सुभासपा के विधायकों को लेकर लगाए जा रहे आरोपों पर प्रतिक्रिया देते हुए डॉ. राजभर ने कहा कि विपक्ष केवल राजनीतिक भ्रम फैलाने का प्रयास कर रहा है। उन्होंने कहा कि यदि वह भी विपक्ष के कई विधायक और सांसद अपने संपर्क में होने का दावा करें तो नई राजनीतिक बहस शुरू हो सकती है, लेकिन उनकी पार्टी अफवाहों की राजनीति में विश्वास नहीं रखती।
उन्होंने कहा कि विपक्ष के कई नेता बिना तथ्यों के बयान देकर केवल सुर्खियां बटोरने की कोशिश कर रहे हैं, जबकि वास्तविक स्थिति इससे बिल्कुल अलग है।
जनप्रतिनिधियों के लिए भी हो योग्यता परीक्षा
राजनीतिक व्यवस्था में सुधार की आवश्यकता बताते हुए डॉ. अरविंद राजभर ने कहा कि जिस प्रकार प्रशासनिक सेवाओं में चयन के लिए कठिन परीक्षाएं और साक्षात्कार अनिवार्य हैं, उसी प्रकार जनप्रतिनिधियों के लिए भी न्यूनतम योग्यता और परीक्षा जैसी व्यवस्था पर गंभीरता से विचार होना चाहिए।
उन्होंने कहा कि संविधान की शिक्षा को प्रारंभिक स्तर से ही पाठ्यक्रम का हिस्सा बनाया जाना चाहिए ताकि नागरिक अपने अधिकारों और कर्तव्यों के प्रति जागरूक बन सकें। उनके अनुसार आज का युवा रोजगार, शिक्षा, विकास और सामाजिक समरसता जैसे मुद्दों पर राजनीति चाहता है और सुभासपा भी इन्हीं विषयों को प्राथमिकता दे रही है।
छात्र आंदोलन और ब्राह्मण समाज पर भी रखी राय
दिल्ली में हुए छात्र आंदोलन पर प्रतिक्रिया देते हुए उन्होंने कहा कि जब तक आंदोलन छात्रों के हितों तक सीमित था, तब तक उसका समर्थन किया जा सकता था, लेकिन राजनीतिक दलों के हस्तक्षेप के बाद आंदोलन का स्वरूप बदल गया। ऐसे में सरकार द्वारा उठाए गए कदमों को उन्होंने उचित बताया।
ब्राह्मण समाज को लेकर हो रही राजनीतिक टिप्पणियों पर उन्होंने कहा कि ब्राह्मण समाज भारतीय संस्कृति और परंपरा का सम्मानित वर्ग है तथा उसका सम्मान हर परिस्थिति में बनाए रखा जाना चाहिए। उन्होंने कुछ राजनीतिक दलों पर समाज को बांटने वाली भाषा का प्रयोग करने का आरोप भी लगाया।
2027 के लिए चुनावी संदेश
रामनगर का यह दौरा केवल एक संगठनात्मक बैठक तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इसे सुभासपा की आगामी चुनावी रणनीति के सार्वजनिक संकेत के रूप में देखा जा रहा है। पूर्वांचल की 83 सीटों पर प्रभाव का दावा, रामनगर से प्रत्याशी उतारने की स्पष्ट मंशा, एनडीए के साथ मजबूती से चुनाव लड़ने का भरोसा और राजनीति में योग्यता आधारित व्यवस्था लागू करने की वकालत के माध्यम से डॉ. अरविंद राजभर ने यह संदेश देने का प्रयास किया कि उनकी पार्टी वर्ष 2027 के विधानसभा चुनाव में केवल सहयोगी दल की भूमिका तक सीमित नहीं रहना चाहती, बल्कि सत्ता के समीकरण तय करने वाली प्रभावशाली राजनीतिक ताकत बनने की तैयारी कर रही है।
अब राजनीतिक गलियारों की नजर इस बात पर टिकी है कि रामनगर से उठी यह चुनावी हुंकार आगामी विधानसभा चुनाव में जनसमर्थन के रूप में कितनी मजबूत साबित होती है।

