मुंबई एसिड अटैक: प्रीति राठी की दर्दनाक कहानी, जिसने पूरे देश को झकझोर दिया
देश के सबसे चर्चित एसिड अटैक मामलों में शामिल प्रीति राठी केस आज भी लोगों के जेहन में ताजा है। दिल्ली के नरेला की रहने वाली 23 वर्षीय प्रीति राठी ने कड़ी मेहनत के दम पर भारतीय नौसेना के अस्पताल आईएनएचएस अश्विनी में नर्स की नौकरी हासिल की थी। परिवार में खुशी का माहौल था और प्रीति अपने सपनों को साकार करने के लिए मुंबई रवाना हुई थीं। लेकिन किसी ने नहीं सोचा था कि उनका यह सफर उनकी जिंदगी का आखिरी सफर बन जाएगा।
मुंबई स्टेशन पर हुआ हमला
2 मई 2013 को प्रीति राठी अपने परिवार के साथ गरीब रथ एक्सप्रेस से मुंबई के बांद्रा टर्मिनस पहुंचीं। ट्रेन से उतरते ही भीड़ में मौजूद एक युवक ने उनके चेहरे पर तेजाब फेंक दिया और मौके से फरार हो गया। तेजाब से प्रीति का चेहरा, आंखें, श्वसन तंत्र और शरीर के कई हिस्से गंभीर रूप से झुलस गए। उन्हें तुरंत अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां डॉक्टरों ने उन्हें बचाने की हर संभव कोशिश की।
एक महीने तक जिंदगी की जंग
करीब एक महीने तक प्रीति ने अस्पताल में जिंदगी और मौत के बीच संघर्ष किया। एसिड के कारण उनके फेफड़ों और श्वसन तंत्र को गंभीर नुकसान पहुंचा था। कई सर्जरी और लगातार इलाज के बावजूद उनकी हालत में सुधार नहीं हो सका। आखिरकार 1 जून 2013 को उन्होंने दम तोड़ दिया। उनकी मौत ने पूरे देश को झकझोर दिया और महिलाओं की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े हुए।
कैसे पहुंची पुलिस आरोपी तक?
शुरुआत में पुलिस के पास हमलावर के बारे में कोई ठोस सुराग नहीं था। जांच के दौरान कई लोगों से पूछताछ की गई और सीसीटीवी फुटेज सहित अन्य तकनीकी साक्ष्य जुटाए गए। बाद में जांच मुंबई क्राइम ब्रांच को सौंपी गई। करीब आठ महीने की जांच के बाद पुलिस ने जनवरी 2014 में दिल्ली के नरेला निवासी अंकुर पंवार को गिरफ्तार किया।
क्या थी हमले की वजह?
जांच एजेंसियों के अनुसार अंकुर पंवार प्रीति का पड़ोसी था। पुलिस का दावा था कि वह प्रीति की सफलता से ईर्ष्या करता था। परिवार और आसपास के लोग अक्सर उसकी तुलना प्रीति से करते थे, क्योंकि प्रीति को भारतीय नौसेना में नौकरी मिल गई थी, जबकि अंकुर को नौकरी नहीं मिल रही थी। इसी जलन और मानसिक कुंठा के चलते उसने इस वारदात को अंजाम देने की साजिश रची।
अदालत का फैसला
सुनवाई के बाद विशेष अदालत ने अंकुर पंवार को हत्या और एसिड अटैक का दोषी करार दिया। ट्रायल कोर्ट ने उसे मृत्युदंड की सजा सुनाई थी। बाद में उच्च न्यायालय ने इस सजा को बदलकर आजीवन कारावास कर दिया। अदालत ने अपने फैसले में कहा कि यह एक बेहद जघन्य अपराध था, जिसने एक युवा महिला के जीवन और उसके सपनों को हमेशा के लिए खत्म कर दिया।
देश के लिए सबक बना यह मामला
प्रीति राठी मामला भारत में एसिड अटैक पीड़ितों की सुरक्षा, तेजाब की बिक्री पर नियंत्रण और महिलाओं के खिलाफ होने वाले गंभीर अपराधों पर सख्त कानून की आवश्यकता को लेकर एक महत्वपूर्ण उदाहरण बना। इस घटना ने पूरे देश में आक्रोश पैदा किया और एसिड की खुली बिक्री पर नियंत्रण को लेकर बहस तेज हुई।
आज भी प्रीति राठी की कहानी एक ऐसे सपने की कहानी है, जिसे किसी की ईर्ष्या और नफरत ने अधूरा छोड़ दिया। उनका मामला न्याय व्यवस्था और समाज दोनों के लिए एक महत्वपूर्ण सीख बनकर याद किया जाता है।

