पहले सिया अग्रवाल… फिर बेंगलुरु की श्वेता, आखिर रिश्तों में बढ़ती हिंसा क्यों बन रही है चिंता का विषय?
अनुज त्यागी
पिछले कुछ समय में देश में रिश्तों से जुड़े कई ऐसे हत्याकांड सामने आए हैं, जिन्होंने पूरे समाज को झकझोर कर रख दिया है। कभी पति की हत्या, कभी पत्नी की हत्या, तो कभी पूरे परिवार को निशाना बनाने जैसी घटनाओं ने यह सवाल खड़ा कर दिया है कि आखिर रिश्तों में विश्वास, संवाद और धैर्य की जगह हिंसा क्यों लेती जा रही है।

सिया
ताजा मामला बेंगलुरु का है। पुलिस के अनुसार 25 वर्षीय टेक प्रोफेशनल श्वेता का केनेथ नाम के युवक से प्रेम संबंध था। बताया जा रहा है कि परिवार इस रिश्ते के पक्ष में नहीं था, जिसके बाद श्वेता घर छोड़कर लिव-इन रिलेशनशिप में रहने लगी। इसके बावजूद उसके माता-पिता लगातार बेटी को वापस घर लाने की कोशिश करते रहे और चाहते थे कि परिवार फिर से एक हो जाए।
जांच में सामने आए आरोपों के अनुसार, इसी दौरान संपत्ति को लेकर विवाद भी हुआ। पुलिस का कहना है कि केनेथ ने श्वेता पर परिवार से संपत्ति मांगने का दबाव बनाया, लेकिन उसके पिता ने ऐसा करने से इनकार कर दिया। इसके बाद कथित तौर पर एक साजिश रची गई।
पुलिस के अनुसार, श्वेता दोबारा अपने घर लौटी तो परिवार को लगा कि बेटी ने घर वापस आने का फैसला कर लिया है। लेकिन आरोप है कि उसी रात मां, पिता और छोटी बहन पर धारदार हथियार से हमला किया गया, जिसमें तीनों की मौत हो गई। जांच एजेंसियों का कहना है कि इस वारदात में केनेथ की भी भूमिका होने का संदेह है।
फिलहाल पुलिस ने श्वेता को गिरफ्तार कर लिया है, जबकि केनेथ फरार है और उसकी तलाश जारी है। पूछताछ में श्वेता ने कथित तौर पर कहा कि उसे अपनी जिंदगी बंधन जैसी महसूस होती थी और मानसिक तनाव के कारण उसने यह कदम उठाया। हालांकि पुलिस पूरे मामले की हर पहलू से जांच कर रही है।
यह मामला ऐसे समय सामने आया है जब हाल के दिनों में कई चर्चित घटनाएं देशभर में सुर्खियों में रही हैं। सोनम रघुवंशी पर अपने पति राजा रघुवंशी की हत्या की साजिश रचने के आरोपों वाला मामला, मेरठ की मुस्कान रस्तोगी पर अपने पति सौरभ राजपूत की हत्या के आरोप, हरियाणा की यूट्यूबर रवीना पर अपने पति की हत्या के आरोप, बिजनौर की शिवानी पर अपने पति दीपक की हत्या के आरोप और इससे पहले सामने आए सिया अग्रवाल जैसे मामलों ने रिश्तों में बढ़ती हिंसा को लेकर गंभीर चिंता पैदा की है। इन सभी मामलों में जांच या न्यायिक प्रक्रिया अलग-अलग चरणों में चल रही है।
इन घटनाओं ने समाज के सामने कई महत्वपूर्ण सवाल खड़े कर दिए हैं। क्या रिश्तों में संवाद की कमी बढ़ रही है? क्या गुस्सा, लालच, मानसिक तनाव और अविश्वास लोगों को ऐसे अपराधों की ओर धकेल रहे हैं? विशेषज्ञों का मानना है कि किसी भी रिश्ते में मतभेद होना सामान्य बात है, लेकिन उसका समाधान हिंसा नहीं हो सकता।
लगातार सामने आ रहे ऐसे मामलों ने परिवार, समाज और युवाओं के बीच संवाद, मानसिक स्वास्थ्य और रिश्तों की मजबूती पर गंभीर चर्चा की आवश्यकता को फिर से सामने ला दिया है। हर मामला अलग होता है और उसका फैसला अदालत तथा जांच एजेंसियां करती हैं, लेकिन एक बात स्पष्ट है कि रिश्तों में हिंसा की बढ़ती घटनाएं पूरे समाज के लिए चिंता का विषय बन चुकी हैं।
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