नई दिल्ली: मोदी सरकार में बड़े मंत्रिमंडल फेरबदल की तैयारी, जॉर्ज कुरियन का इस्तीफा स्वीकार, कई बड़े नामों पर चर्चा तेज

अनुज त्यागी

नई दिल्ली में मोदी सरकार के मंत्रिमंडल में बड़े बदलाव को लेकर राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। इसी बीच केंद्रीय मंत्री जॉर्ज कुरियन ने इस्तीफा दे दिया है, जिसे राष्ट्रपति ने स्वीकार कर लिया है। बताया जा रहा है कि उनका राज्यसभा कार्यकाल भी समाप्त हो रहा था, जिसके चलते यह कदम सामने आया है।

सूत्रों के अनुसार, जॉर्ज कुरियन हाल ही में केरल में विधानसभा चुनाव हार गए थे। माना जा रहा है कि केंद्रीय नेतृत्व के निर्देश पर उन्हें अब राज्य की राजनीति में सक्रिय भूमिका दी जा सकती है। उनके इस्तीफे के बाद कैबिनेट विस्तार और फेरबदल की चर्चाएं और तेज हो गई हैं।

जानकारी के मुताबिक, रवनीत बिट्टू का राज्यसभा कार्यकाल समाप्त हो गया है, जबकि हर्ष मल्होत्रा के दिल्ली प्रदेश अध्यक्ष बनने और पंकज चौधरी के उत्तर प्रदेश प्रदेश अध्यक्ष बनने के बाद भी मंत्रिमंडल में बदलाव की स्थिति बनी हुई है। इसके साथ ही कई अन्य केंद्रीय मंत्रियों के इस्तीफे की भी संभावना जताई जा रही है।

इसी बीच राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा भी तेज है कि संभावित मंत्रिमंडल फेरबदल में संगठनात्मक और क्षेत्रीय संतुलन के साथ-साथ राजनीतिक समीकरण साधने की कोशिश की जा सकती है। इसी क्रम में यह भी चर्चा है कि हाल के समय में परंपरागत वोट बैंक माने जाने वाले सवर्ण वर्ग में नाराजगी को देखते हुए, सरकार आगामी चुनावी रणनीति के तहत संतुलन बनाने पर विचार कर सकती है।

सूत्रों की मानें तो केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का नाम भी संभावित बदलाव की सूची में बताया जा रहा है। उनके विभाग को लेकर NEET पेपर लीक, CBSE परीक्षाओं में गड़बड़ी और UGC से जुड़े फैसलों के साथ-साथ परंपरागत वोट बैंक माने जाने वाले सवर्ण वर्ग में नाराजगी की चर्चा भी राजनीतिक हलकों में रही है। इन्हीं सभी मुद्दों को देखते हुए उनके मंत्रालय में बदलाव या संगठन में भेजे जाने की अटकलें लगाई जा रही हैं।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि सरकार संगठन और प्रशासन के बीच बेहतर संतुलन बनाने के लिए कुछ मंत्रियों को बदला जा सकता है और कुछ को संगठनात्मक जिम्मेदारियां दी जा सकती हैं।

आगामी विधानसभा चुनावों को देखते हुए मंत्रिमंडल में उत्तर प्रदेश, पंजाब, गुजरात और उत्तराखंड जैसे राज्यों से नए चेहरों को शामिल किए जाने की संभावना जताई जा रही है। इसे आगामी चुनावी रणनीति और राजनीतिक संतुलन से जोड़कर देखा जा रहा है।

हालांकि इस पूरे घटनाक्रम पर अभी तक सरकार की ओर से कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है, लेकिन राजनीतिक चर्चाएं लगातार जारी हैं।

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