आबिद प्रधान को जमानत मिलने पर भड़कीं पूजा पाल, बोलीं- सुप्रीम कोर्ट में दूंगी चुनौती
अनुज त्यागी
प्रयागराज। पूर्व बसपा विधायक राजू पाल हत्याकांड के आरोपी आबिद प्रधान को इलाहाबाद हाईकोर्ट से जमानत मिलने के बाद मामला एक बार फिर सुर्खियों में आ गया है। इस फैसले पर राजू पाल की पत्नी और चायल से विधायक रहीं पूजा पाल ने कड़ी आपत्ति जताई है। उन्होंने कहा है कि जमानत आदेश को वह सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देंगी और मामले की गंभीरता को देखते हुए इसकी दोबारा समीक्षा जरूरी है।
पूजा पाल ने आरोप लगाया कि आरोपी पक्ष ने अदालत में कई महत्वपूर्ण तथ्यों को छिपाकर जमानत प्राप्त की है। उन्होंने कहा कि यह केवल एक सामान्य आपराधिक मामला नहीं है, बल्कि उनके परिवार से जुड़ा बेहद संवेदनशील और लंबा चलने वाला केस है। पूजा पाल ने कहा कि जेल से बाहर आने के बाद आबिद प्रधान द्वारा सोशल मीडिया पर कथित रूप से धमकी भरा वीडियो जारी किया गया, जिससे यह साफ होता है कि आरोपियों में कानून का भय नहीं है।
उन्होंने कहा कि ऐसे वीडियो और बयान पीड़ित पक्ष पर दबाव बनाने की कोशिश हैं, लेकिन वह किसी भी तरह की धमकी से डरने वाली नहीं हैं। पूजा पाल ने दोहराया कि वह अपने पति के हत्याकांड में न्याय मिलने तक संघर्ष जारी रखेंगी।
इसके साथ ही उन्होंने अपनी और मामले के गवाहों की सुरक्षा बढ़ाने की भी मांग की है। उनका कहना है कि इस तरह के मामलों में गवाहों की सुरक्षा बेहद जरूरी है, क्योंकि पहले भी इस केस में गवाहों पर दबाव और धमकी के आरोप लगते रहे हैं।
कौन हैं पूजा पाल? संघर्ष से राजनीति तक का सफर
पूजा पाल उत्तर प्रदेश की उन महिला नेताओं में से हैं, जिनकी जीवन यात्रा संघर्ष और साहस की मिसाल मानी जाती है। उनका जन्म एक साधारण परिवार में हुआ था और बचपन से ही आर्थिक कठिनाइयों का सामना करना पड़ा। परिवार की स्थिति ऐसी थी कि घर का खर्च चलाना भी आसान नहीं था। इसी वजह से उन्होंने शुरुआती दिनों में छोटे-मोटे काम करके परिवार का सहारा बनने की कोशिश की।
राजनीति में आने से पहले पूजा पाल ने आम जीवन की मुश्किलों को करीब से देखा और उन्हीं अनुभवों ने उन्हें मजबूत बनाया।
शादी के 9 दिन बाद उजड़ गया सुहाग

पूजा पाल की शादी 15 जनवरी 2005 को बसपा विधायक राजू पाल से हुई थी। लेकिन शादी के सिर्फ 9 दिन बाद ही 25 जनवरी 2005 को प्रयागराज में दिनदहाड़े राजू पाल की गोली मारकर हत्या कर दी गई। यह घटना उस समय के सबसे चर्चित राजनीतिक हत्याकांडों में से एक बन गई थी।
राजू पाल ने उस समय बाहुबली राजनीति को चुनौती देकर विधानसभा चुनाव जीता था, जिसके बाद उनकी हत्या ने पूरे प्रदेश में सनसनी फैला दी थी।
राजनीति में संघर्ष और जीत का सफर
पति की हत्या के बाद पूजा पाल ने हार मानने के बजाय राजनीतिक और सामाजिक लड़ाई शुरू की। शुरुआती दौर में उन्हें उपचुनाव में हार का सामना करना पड़ा, लेकिन उन्होंने राजनीति नहीं छोड़ी।
2007 में उन्होंने फिर से चुनाव लड़ते हुए सफलता हासिल की और विधानसभा पहुंचीं। इसके बाद 2012 में भी उन्होंने जीत दर्ज की और अपनी राजनीतिक पकड़ मजबूत की।
काफी समय तक वह बसपा और फिर अन्य राजनीतिक परिस्थितियों में सक्रिय रहीं और बाद में समाजवादी पार्टी के साथ जुड़ गईं।
2022 में सपा के टिकट पर बनीं विधायक
वर्ष 2022 के विधानसभा चुनाव में समाजवादी पार्टी ने पूजा पाल को चायल विधानसभा सीट से उम्मीदवार बनाया। इस चुनाव में वह विधायक निर्वाचित हुईं और एक बार फिर विधानसभा पहुंचीं। उस समय उन्हें पार्टी का मजबूत चेहरा माना गया।
सपा से दूरी और राजनीतिक बदलाव
विधायक बनने के बाद धीरे-धीरे पूजा पाल और समाजवादी पार्टी नेतृत्व के बीच मतभेद सामने आने लगे। राजनीतिक घटनाक्रमों और कुछ बयानों के बाद उनकी पार्टी से दूरी बढ़ती गई।
बाद में उन्होंने कई मौकों पर प्रदेश सरकार की कानून-व्यवस्था और कुछ फैसलों की सराहना की, जिसके बाद पार्टी नेतृत्व के साथ उनके संबंध और कमजोर हुए। अंततः उन्हें समाजवादी पार्टी से निष्कासित कर दिया गया।
इसके बाद वह भाजपा के करीब मानी जाने लगीं और राजनीतिक हलकों में उनके रुख में बदलाव की चर्चाएं भी तेज हो गईं।
आज पूजा पाल उत्तर प्रदेश की राजनीति में एक ऐसी नेता के रूप में देखी जाती हैं, जिन्होंने व्यक्तिगत त्रासदी को राजनीतिक संघर्ष में बदल दिया। अब आबिद प्रधान की जमानत के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट जाने की घोषणा के साथ यह मामला एक बार फिर कानूनी और राजनीतिक दोनों स्तर पर चर्चा में आ गया है।

