बागपत में फर्जी खनन रॉयल्टी रैकेट का भंडाफोड़, STF ने 5 आरोपियों को किया गिरफ्तार; मुजफ्फरनगर समेत कई जिलों तक फैले तार
बागपत। उत्तर प्रदेश में अवैध खनन और सरकारी राजस्व को भारी नुकसान पहुंचाने वाले एक बड़े फर्जीवाड़े का खुलासा करते हुए यूपी एसटीएफ मेरठ यूनिट और कोतवाली बागपत पुलिस की संयुक्त टीम ने खनन विभाग की फर्जी रॉयल्टी तैयार करने वाले गिरोह का पर्दाफाश किया है। कार्रवाई के दौरान गिरोह के 5 सदस्यों को गिरफ्तार किया गया है। मामले में कई विभागीय कर्मचारियों, बाबुओं और ठेकेदारों की भूमिका भी जांच के घेरे में आ गई है
बागपत पुलिस अधीक्षक सूरज राय ने जानकारी देते हुए बताया कि यूपी एसटीएफ मेरठ से प्राप्त गोपनीय सूचना के आधार पर संयुक्त टीम ने कार्रवाई की। जांच में सामने आया कि आरोपी खनन विभाग की असली रॉयल्टी (ISTP) प्राप्त करने के बाद उसमें डिजिटल माध्यमों से छेड़छाड़ करते थे। रॉयल्टी की तारीख, वाहन संख्या, खनिज की मात्रा और अन्य विवरण बदलकर नई फर्जी रॉयल्टी तैयार की जाती थी, जिसका इस्तेमाल अवैध रूप से खनन सामग्री के परिवहन और सरकारी भुगतान प्राप्त करने के लिए किया जाता था।
पुलिस जांच में यह भी सामने आया है कि यह गिरोह विभिन्न सरकारी विभागों के कुछ ठेकेदारों के लिए काम करता था। अवैध खनन से लाई गई मोरंग और अन्य निर्माण सामग्री को वैध दिखाने के लिए फर्जी रॉयल्टी तैयार कराई जाती थी। बाद में इन्हीं दस्तावेजों को सरकारी बिलों के साथ संलग्न कर भुगतान प्राप्त किया जाता था, जिससे राज्य सरकार को लाखों रुपये के राजस्व का नुकसान पहुंच रहा था।
कई जिलों तक फैले मिले नेटवर्क के तार
एसटीएफ की जांच में खुलासा हुआ है कि इस रैकेट का नेटवर्क कई जिलों तक फैला हुआ है। प्रारंभिक जांच में मुजफ्फरनगर, सहारनपुर, संभल, गौतमबुद्धनगर (नोएडा) तथा गाजियाबाद विकास प्राधिकरण (GDA) से जुड़े कुछ बाबुओं और कर्मचारियों के नाम सामने आए हैं। जांच एजेंसियों को आशंका है कि इन जिलों में भी फर्जी रॉयल्टी पर्चियों का इस्तेमाल कर अवैध खनन सामग्री को सरकारी कार्यों में खपाया गया और भुगतान प्राप्त किया गया।
पुलिस सूत्रों के अनुसार पीडब्ल्यूडी से जुड़े कुछ कर्मचारियों और ठेकेदारों की भूमिका भी संदिग्ध पाई गई है। अब यह जांच की जा रही है कि फर्जी रॉयल्टी के जरिए कितने सरकारी निर्माण कार्यों में भुगतान कराया गया और इस पूरे नेटवर्क से सरकार को कितना आर्थिक नुकसान हुआ।
डिजिटल साक्ष्यों से खुल सकते हैं कई बड़े राज
गिरफ्तार आरोपियों के कब्जे से लैपटॉप, मोबाइल फोन, डिजिटल रिकॉर्ड और बड़ी संख्या में व्हाट्सएप चैट बरामद हुई हैं। जांच एजेंसियों का मानना है कि इन डिजिटल साक्ष्यों से कई अन्य लोगों की संलिप्तता उजागर हो सकती है। बरामद उपकरणों और दस्तावेजों का फॉरेंसिक परीक्षण कराया जा रहा है।
मामले की गंभीरता को देखते हुए सीओ सिटी बागपत के नेतृत्व में एक विशेष विवेचनात्मक टीम गठित की गई है। यह टीम पूरे नेटवर्क के बैकवर्ड और फॉरवर्ड लिंक की जांच कर रही है ताकि फर्जी रॉयल्टी तैयार करने, उसका उपयोग कराने और भुगतान दिलाने वाले सभी लोगों की पहचान की जा सके।
23 लोग जांच के दायरे में, और गिरफ्तारियां संभव
एसपी सूरज राय ने बताया कि अब तक की जांच में 23 लोगों के नाम सामने आए हैं। सभी के खिलाफ थाना कोतवाली बागपत में मुकदमा दर्ज कर आवश्यक कानूनी कार्रवाई की जा रही है। पुलिस का कहना है कि जांच आगे बढ़ने के साथ इस मामले में और भी गिरफ्तारियां हो सकती हैं। फरार आरोपियों की तलाश के लिए भी टीमें लगाई गई हैं।
एसटीएफ और बागपत पुलिस की इस कार्रवाई को अवैध खनन, फर्जी दस्तावेज तैयार कर सरकारी धन के दुरुपयोग और राजस्व चोरी के खिलाफ बड़ी सफलता माना जा रहा है। जांच एजेंसियों का मानना है कि आने वाले दिनों में इस मामले से जुड़े कई और बड़े नाम सामने आ सकते हैं।
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