Anuj Tyagi


बिजनौर सांसद चंदन चौहान की पहल रंग लाई: मोरना शुगर मिल के कायाकल्प को मिली ₹261 करोड़ की बड़ी मंजूरी

मीरापुर विधायक रहते शुरू हुआ संघर्ष अब पहुंचा अंजाम; 5000 TCD क्षमता के आधुनिक प्लांट से किसानों में उत्साह

मुजफ्फरनगर, 
मुजफ्फरनगर जनपद के विकास में एक और महत्वपूर्ण अध्याय जुड़ गया है। जनपद स्थित दि गंगा किसान सहकारी चीनी मिल लि. मोरना के विस्तारीकरण व आधुनिकीकरण का रास्ता अब पूरी तरह साफ हो गया है। बिजनौर सांसद चंदन चौहान के निरंतर प्रयासों और लंबी कानूनी-प्रशासनिक प्रक्रिया के बाद उत्तर प्रदेश सरकार ने इस महत्वाकांक्षी परियोजना के लिए करोड़ों रुपये की मंजूरी प्रदान कर दी है। सांसद की इस पहल से क्षेत्र के हजारों गन्ना किसानों की वर्षों पुरानी मांग अब साकार होने जा रही है।

विधायक से सांसद तक, नहीं रुका ‘मोरना मिल मिशन’

उल्लेखनीय है कि मोरना चीनी मिल का विस्तारीकरण सांसद चंदन चौहान की प्राथमिकताओं में लंबे समय से शामिल रहा है। मीरापुर विधानसभा से विधायक रहते हुए उन्होंने सदन और शासन स्तर पर मिल की जर्जर स्थिति और 2500 TCD की सीमित क्षमता से किसानों को हो रही परेशानियों को प्रमुखता से उठाया था। उनके सतत प्रयासों से पहले परियोजना की घोषणा हुई और अब सांसद बनने के बाद लगातार पैरवी कर बजट स्वीकृत कराया गया। शासन द्वारा जारी 10 पन्नों की विस्तृत मंत्रिपरिषद टिप्पणी इस बात का प्रमाण है कि परियोजना अब धरातल पर उतरने के लिए तैयार है।

₹261 करोड़ से बदलेगी मोरना मिल की तस्वीर

शासन के अनुसार, पब्लिक इन्वेस्टमेंट बोर्ड (PIB) ने परियोजना की कुल लागत ₹261.91 करोड़ (26191.00 लाख) का आकलन कर संस्तुति प्रदान की है। हालांकि डीपीआर के अनुसार अनुमानित लागत ₹275.65 करोड़ थी। परियोजना का वित्त पोषण 50 प्रतिशत राज्य सरकार की अंशपूंजी तथा 50 प्रतिशत राज्य सरकार द्वारा ऋण के रूप में किया जाएगा।

2500 से 5000 TCD होगी पेराई क्षमता

वर्तमान में मोरना चीनी मिल की पेराई क्षमता 2500 TCD है, जो वर्ष 1995-96 के विस्तार के बाद से अपरिवर्तित थी। नई योजना के तहत मिल की क्षमता बढ़ाकर 5000 TCD की जाएगी। आधुनिक तकनीक पर आधारित यह प्लांट न केवल उत्पादन बढ़ाएगा, बल्कि चीनी रिकवरी को 11.50 प्रतिशत तक ले जाने का लक्ष्य भी तय किया गया है।

किसानों और रोजगार को मिलेगा बड़ा लाभ

मिल के विस्तारीकरण से क्षेत्रीय किसानों को अब दूर-दराज की मिलों में गन्ना ले जाने की मजबूरी नहीं रहेगी। समय से पेराई और भुगतान की स्थिति मजबूत होगी। साथ ही, आधुनिक प्लांट से प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से सैकड़ों युवाओं को रोजगार के अवसर मिलेंगे और मिल की वित्तीय स्थिति भी सुदृढ़ होगी।

विस्तारीकरण क्यों था जरूरी

गन्ना बाहुल्य क्षेत्र में स्थित होने के बावजूद सीमित क्षमता और पुरानी मशीनरी के कारण मोरना मिल किसानों की जरूरतें पूरी नहीं कर पा रही थी। इससे उत्पादन लागत बढ़ रही थी और मिल को लगातार घाटा उठाना पड़ रहा था। अब नई तकनीक से मिल की कार्यक्षमता बढ़ेगी और किसानों की आय में भी इजाफा होगा।

वर्जन

“मोरना मिल के किसानों की समस्या मेरी अपनी समस्या रही है। मीरापुर विधायक रहते जो संकल्प लिया था, आज बजट की स्वीकृति के साथ वह साकार हुआ है। यह उपलब्धि मोरना क्षेत्र के हर अन्नदाता की जीत है।”
— चंदन चौहान, सांसद बिजनौर


 

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