इसकी चर्चा दिनभर रही, जबकि अध्यापक संघ भी इसको लेकर आगामी कदम को लेकर विचार कर रहे हैं, अधिकारियों से भी मिलने की भी तैयारियां कर रहे हैं। इस बारे में जिला मौलिक शिक्षा अधिकारी सुधीर कालड़ा को कॉल की गई, लेकिन उन्होंने कॉल ही रिसीव नहीं की।
क्या है पूरा मामला?
निदेशालय के आदेशों पर गौर करें तो मामला प्रमोशन में पांच प्रतिशत अंकों की रिलेक्सेशन देने से जुड़ा है। सर्विस रूल 2012 के तहत ईएसएचएम की पोस्ट तैयार की गई थी। इसमें टीजीटी/भाषा अध्यापकों को ईएसएचएम की पोस्ट के लिए विभाग द्वारा समय-समय पर प्रमोट किया जाना था। इसमें विभाग की जानकारी में आया कि कुछ एससी/बीसी उम्मीदवारों को अनजाने में विभाग द्वारा, स्नातक डिग्री में हासिल अंकों के आधार पर, प्रमोशन प्रोसेस में पांच प्रतिशत की छूट दे दी गई।
इसमें चीफ सेक्रेटरी हरियाणा के जारी पत्र का हवाला भी दिया गया। इसके बाद आदेशों में यह भी कहा गया कि चीफ सेक्रेटरी की ओर से मिली क्लेरिफिकेशन के अनुसार यह स्पष्ट हो गया कि यह छूट आरक्षित वर्ग के लिए शैक्षणिक संस्थान को ज्वाइन करते वक्त ही दी जानी है, जबकि यह प्रमोशन में नहीं दी जानी।
यह भी कहा कि सीधी भर्ती के दौरान यह छूट दी जानी है और वह भी तब जब आरक्षित वर्ग के लिए रखी सीटों पर पर्याप्त उम्मीदवार न हों। इसी पर विभाग ने उक्त प्रमोशन केस को दोबारा से देखा और पाया कि उनको प्रमोशन गलत दे दी है।
रिवर्ट होने पर खाली हो जाएंगे पद
ईएसएचएम को रिवर्ट करने के बाद स्कूलों में यह पद खाली हो जाएंगे। वरिष्ठता के आधार पर इन खाली पदों को भरने की तैयारी होगी। रिवर्ट होने के बाद यह सभी ईएसएचएम अपनी पिछले पद पर चले जाएंगे। इसका विरोध भी हो रहा है।

