हांसी से चलने से पहले उसने मस्तनाथ कॉलोनी में रहने वाले दोस्त दीक्षित के घर पर कई बार फोन किया। कई बार फोन आने के बाद उसकी की मां ने कॉल की तो पता चला कि कॉल करने वाला दीक्षित का दोस्त बोल रहा है। उसके बाद दीक्षित के स्वजन ने उससे मिलने के लिए मना कर दिया था।
घात लगाकर बैठा था दोस्त
सुबह फोन पर आने के लिए मना करने के बाद वारदात को अंजाम देने वाला सहपाठी घात लगाए हुए बैठा था। उसे यकीन था कि दीक्षित घर से बाहर जरूर आएगा। उसके बाद जब दीक्षित दूध लेने के लिए एक्टिवा लेकर घर से निकला तो पहले से घात लगाए हुए किशोर ने उसे देख लिया। उसने उसका पीछा करना शुरू कर दिया।
दूध लेने के बाद जब दीक्षित ने घर पर फोन किया और बोला कि वह घर पर आ रहा था। उसके बाद किशोर ने दीक्षित से बातचीत की और उसे सातरोड खुर्द के रेलवे स्टेशन की तरफ झाड़ियों में कच्चे रास्ते की तरफ लेकर पहुंचा। दीक्षित ने कच्चे रास्ते पर एक्टिवा रोकी तो उसके पीछे ही किशोर ने अपनी बाइक रोक दी।
बचने की कोशिश करता रहा दीक्षित
उसके बाद वह अपने दादा की लाइसेंसी बंदूक लेकर दीक्षित की तरफ आगे बढ़ा तो बंदूक देखने के बाद दीक्षित कच्चे रास्ते पर दौड़ पड़ा। किशोर भी उसके पीछे दौड़ा और उसने फायर कर दिए। कमर में दो गोली लगने से वह जमीन पर गिर गया। उसके बाद किशोर मौके से फरार हो गया।
‘लड़का तड़प रहा है इसे संभाल लो’
वारदात करीब सवा सात बजे के बाद की है। स्टेशन के सामने बनी कॉलोनी में रहने वाली महिला चिंटियों को आटा डालने के लिए कच्चे रास्ते की तरफ आई। उस दौरान महिला ने फोन की घंटी सुनी तो वह मौके पर पहुंची तो उसने देखा कि एक किशोर जमीन पर लहूलुहान हालत में पड़ा है और उसकी जेब में रखा हुआ फोन बज रहा है। महिला ने फोन उठाया और बात की।
महिला ने दीक्षित के पिता प्रकाश को बताया कि उसके बेटे को गोली लगी हुई है और वह तड़प रहा है। पता चलने पर दीक्षित की मां और पिता मौके पर पहुंचे और बेटे को अस्पताल लेकर पहुंचे उस समय तक दीक्षित की मौत हो चुकी थी।
एक्टिवा और चप्पल वहीं मिली
सूचना मिलने पर राजकीय रेलवे पुलिस मौके पर पहुंची। पुलिस को वारदात स्थल दीक्षित की एक्टिवा और चप्पल वारदात स्थल पर मिली है। पुलिस ने आसपास के लोगों से भी बातचीत की है। वहीं पुलिस मुख्य सड़क पर लगे सीसीटीवी कैमरे की फुटेज भी खंगाल रही है।
गोली मारने वाले किशोर का दादा सेना से सेवानिवृत्त दीक्षित को दो गोली मारने वाले किशोर का दादा सेना से सेवानिवृत्त हैं। वे एक बैंक में गार्ड की नौकरी करते है। जिसके चलते उनके पास लाइसेंसी डोगा बंदूक है। जो रात के समय वे अक्सर अपनी बंदूक अपने पास रख कर सोते है।
सुबह बंदूक किशोर ने उठा ली और वारदात को अंजाम दिया। वारदात करने वाला भी इकलौता है। वहीं मृतक दीक्षित के पिता प्रकाश सेना से नायक के पद से सेवानिवृत्त है।
2013 में हिसार कैंट में उनकी तैनाती थी। वे 2024 में सिक्किम से नायक के पद से सेवानिवृत्त हुए थे। अभी उन्होंने अपने घर पर निर्माणकार्य शुरू किया हुआ है और मिस्त्रियों के लिए चाय बनाने के लिए दूध लेने के लिए भेजा था।

