प्रयागराज। इलाहाबाद हाई कोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसले में ऑनलाइन गेमिंग तथा सट्टेबाजी पर रोक लगाने के लिए कानून बनाने का सुझाव दिया है। कोर्ट ने कहा, इस मामले में अभी कोई प्रभावी कानून नहीं है। सार्वजनिक जुआ अधिनियम 1867 औपनिवेशिक युग का कानून था जो अब प्रासंगिक नहीं रह गया है। वर्चुअली सट्टेबाजी या जुआ राज्य और राष्ट्र की सीमा से परे जा चुका है। सर्वर सिस्टम दुनिया की सीमाओं को खत्म कर चुका है, जिस पर सरकार का कोई नियंत्रण नहीं है।
प्रदेश सरकार के आर्थिक सलाहकार प्रो. केवी राजू की अध्यक्षता में उच्चाधिकार प्राप्त समिति का गठन कर उसमें प्रमुख सचिव के साथ विशेषज्ञों को शामिल करने का निर्देश कोर्ट ने दिया है। यह समिति मौजूदा स्थिति का आकलन कर विधायी व्यवस्था का सुझाव देगी। यह आदेश न्यायमूर्ति विनोद दिवाकर ने आगरा निवासी इमरान खान व अन्य की याचिका स्वीकार करते हुए दिया है।
याचीगण के खिलाफ आगरा के मंटोला थाने में सार्वजनिक जुआ अधिनियम के तहत तीन साल पहले प्राथमिकी दर्ज हुई थी। 27 दिसंबर 2022 को आरोप पत्र दाखिल होने के बाद न्यायिक मजिस्ट्रेट ने समन जारी किया। इसके खिलाफ याचिका दाखिल कर आपराधिक कार्रवाई रद करने की मांग की गई थी।
कोर्ट ने पाया कि आनलाइन सट्टेबाजी और जुआ खेलने वालों के खिलाफ कोई प्रभावी कानून नहीं है। सार्वजनिक जुआ अधिनियम के तहत अधिकतम 2000 रुपये जुर्माना और 12 महीने तक की कैद का प्रविधान है, लेकिन फैंटेसी स्पोर्ट्स, पोकर और ई-स्पोर्ट्स जैसे आनलाइन गेम्स को लेकर कानून अस्पष्ट है। ऑनलाइन प्लेटफार्म राज्य, राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय सीमाओं से संचालित होते हैं।
युवा इसकी जद में आकर नुकसान उठा रहे हैं। कोर्ट के अनुसार भारत के नीति आयोग ने दिसंबर 2020 में नीति पत्र जारी किया था लेकिन अभी यह ग्रे क्षेत्र में यानि अस्पष्ट है। कोर्ट ने निबंधक को आदेश की प्रति मुख्य सचिव के पास अनुपालन के लिए भिजवाने का आदेश दिया है।
युवा इसकी जद में आकर नुकसान उठा रहे हैं। कोर्ट के अनुसार भारत के नीति आयोग ने दिसंबर 2020 में नीति पत्र जारी किया था लेकिन अभी यह ग्रे क्षेत्र में यानि अस्पष्ट है। कोर्ट ने निबंधक को आदेश की प्रति मुख्य सचिव के पास अनुपालन के लिए भिजवाने का आदेश दिया है।
पैसे कमाने के चक्कर में देश के किशोर और युवा आसानी से आनलाइन गेमिंग व सट्टेबाजी की चपेट में आ रहे हैं। उनमें अवसाद, चिंता, अनिंद्रा जैसी स्थिति बन रही है और सामाजिक विघटन बढ़ता जा रहा है। निम्न और मध्य वर्ग के युवा आनलाइन गेम उपलब्ध कराने वाले प्लेटफार्म के झांसे में आकर आर्थिक नुकसान उठा रहे हैं। ऐसी चुनौतियों से निपटने के लिए तत्काल प्रभावी कानून बनाए जाने की आवश्यकता है। -इलाहाबाद हाई कोर्ट
यूके, अमेरिका सहित कई देशों ने किए हैं उपबंध
जुए को नियंत्रित करने के लिए यूनाइटेड किंगडम, अमेरिका सहित दुनिया की कई विकसित व्यवस्थाओं ने उपबंध किए हैं। यूके ने 2005 में जुआ अधिनियम लागू किया। इसमें लाइसेंसिंग आवश्यकताओं, आयु सत्यापन प्रोटोकाल, जिम्मेदार विज्ञापन मानकों और धन शोधन विरोधी उपायों सहित कई तरह के प्रविधान हैं। आयोग भी बनाया गया है।
ऑस्ट्रेलिया ने 2001 में, जबकि संयुक्त राज्य अमेरिका के न्यू जर्सी और पेंसिल्वेनिया जैसे राज्यों ने ऑनलाइन कैसीनो को पूरी तरह से वैध और विनियमित किया है। सिंगापुर और दक्षिण कोरिया सहित कई अन्य देशों ने भी आनलाइन सट्टेबाजी की व्यवस्था की है।
सार्वजनिक जुआ पर कानून
ब्रिटिश सरकार ने सार्वजनिक जुआघरों पर प्रतिबंध के लिए कानून बनाया था। यह ताश के खेल, पासे पर सट्टा लगाने, भौतिक जुआघरों को विनियमित करता था। अधिनियम के तहत अधिकतम जुर्माना 500 रुपये या तीन महीने कैद की सजा थी। वर्ष 1867 में यह पनिवारक था लेकिन आज निष्प्रभावी है।
यूके, अमेरिका सहित कई देशों ने किए हैं उपबंध
जुए को नियंत्रित करने के लिए यूनाइटेड किंगडम, अमेरिका सहित दुनिया की कई विकसित व्यवस्थाओं ने उपबंध किए हैं। यूके ने 2005 में जुआ अधिनियम लागू किया। इसमें लाइसेंसिंग आवश्यकताओं, आयु सत्यापन प्रोटोकाल, जिम्मेदार विज्ञापन मानकों और धन शोधन विरोधी उपायों सहित कई तरह के प्रविधान हैं। आयोग भी बनाया गया है।
ऑस्ट्रेलिया ने 2001 में, जबकि संयुक्त राज्य अमेरिका के न्यू जर्सी और पेंसिल्वेनिया जैसे राज्यों ने ऑनलाइन कैसीनो को पूरी तरह से वैध और विनियमित किया है। सिंगापुर और दक्षिण कोरिया सहित कई अन्य देशों ने भी आनलाइन सट्टेबाजी की व्यवस्था की है।
सार्वजनिक जुआ पर कानून
ब्रिटिश सरकार ने सार्वजनिक जुआघरों पर प्रतिबंध के लिए कानून बनाया था। यह ताश के खेल, पासे पर सट्टा लगाने, भौतिक जुआघरों को विनियमित करता था। अधिनियम के तहत अधिकतम जुर्माना 500 रुपये या तीन महीने कैद की सजा थी। वर्ष 1867 में यह पनिवारक था लेकिन आज निष्प्रभावी है।

