मोदीपुरम। 21 मई की देर शाम को तेज वर्षा संग आए चक्रवाती तूफान ने कई प्रदेशों में तूफान मचा दिया था। कई लोगों की जान गई और काफी नुकसान हुआ। पूरा जनजीवन अस्तव्यस्त हो गया था। वहीं अब, कृषि विश्वविद्यालय के मौसम विज्ञानी ने फिर से चेतावनी दी है कि 28 मई तक एक बार फिर चक्रवाती तूफान वर्षा के साथ राजस्थान, हरियाणा, उत्तराखंड़, हिमाचल प्रदेश, पश्चिमी उत्तर प्रदेश और दिल्ली एनसीआर में दोबारा से दस्तक दे सकता है। हालांकि इसकी रफ्तार पहले के मुकाबलें थोड़ी कम होगी।
सरदार वल्लभ भाई पटेल कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के मौसम विज्ञानी डॉक्टर यूपी शाही कहते हैं कि चक्रवाती तूफान बंगाल की खाड़ी और अरब सागर में गर्म हवाओं के पैदा होने से बनेगा। इस तूफान में तेज रफ्तार के साथ हवा राउंड यानी घूमती है, जिसकी चपेट में जो आता है, उसे गिराने के साथ पोल, पेड़, दीवार तक को ताश के पत्तों की तरह धराशाही कर देती है।
मौसम विज्ञानी ने कहा कि 28 मई तक एक बार फिर चक्रवर्ती तूफान आने के संकेत मिल रहे हैं। वर्षा के होने से गर्मी का असर कम रहेगा और तापमान नियंत्रण में रहेगा। ऐसे तूफान में लोगों को सावधानी बरतने की बेहद जरूरत होती है। अधिकांश आंधी तूफान से फसलों काे बेहद नुकसान होता है। मगर, वर्तमान में सामान्य फसल का कटान हो चुका है। मगर, आम और लीची की फसल चल रही है। ऐसे में आंधी व तूफान से इन दोनों फसलों को नुकसान हो सकता है।

जून के पहले सप्ताह से दस्तक देगी प्रचंड गर्मी

मौसम विज्ञानी ने बताया कि मई का महीना आंधी, तूफान और हल्की वर्षा में निकल जाएगा। मगर, जून के पहले सप्ताह से प्रचंड गर्मी शुरू हो सकती है। जिसमें अधिकतम तापमान 42 से 45 डिग्री तक पहुंचने का अनुमान है। बढ़ते तापमान की यह स्थिति करीब 20 से 25 जून तक रहेगी। उसके बाद 28 अथवा 29 जून को दिल्ली एनसीआर क्षेत्र में मानसून दस्तक दे देगा। उसके बाद कभी वर्षा तो कभी हवा से मौसम खुशनुमा होगा।

चक्रवाती तूफान से बचाव

घर के दरवाजे व खिड़कियों को बंद रखना चाहिए। आपातकालीन स्थिति के लिए मोबाइल, फोन, चार्जर, बैटरी, टार्च, माचिस और रेडिमेड खाने की वस्तुएं घर में अवश्य रखनी चाहिए। चक्रवाती तूफान अथवा आंधी से बचने के लिए सरकारी सूचनाओं का पालन करना चाहिए। किसी भी पुरानी इमारत, क्षतिग्रस्त मकान में और पेड़ के नीचे नहीं रहना चाहिए। मकान-दुकान की छत पर टीन शीट अथवा कोई ऐसा सामान नहीं रखना चाहिए, जिससे वह तूफान में उड़कर दूर गिरे और कोई उसकी चपेट में न आ पाए।

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