नैनीताल। हाई कोर्ट ने नैनीताल शहर सहित अन्य जगहों की यातायात व पार्किंग समस्या को लेकर दायर जनहित याचिकाओं पर एक साथ सुनवाई की।
मंगलवार को मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति जी नरेंद्र की अध्यक्षता वाली खंडपीठ ने मामलों में सुनवाई के बाद स्थानीय नागरिकों की ज्वलंत समस्या का समाधान करते हुए दिशा-निर्देश जारी किए।
कोर्ट ने बीडी पांडे अस्पताल के समीप चौड़ी जगह में तीन मरीज वाहनों और एक एंबुलेंस पार्क करने की अनुमति दे दी है। पूर्व के आदेश में संशोधन करते हुए चिड़ियाघर शटल सेवा के लिए चार की जगह आठ इलेक्ट्रिक वाहन चलाने की अनुमति दी है।
तल्लीताल लेकब्रिज चुंगी में पर्ची के माध्यम से टैक्स वसूलने पर सवाल उठाते हुए पालिका को फास्ट टैग से टैक्स वसूलने के निर्देश दिए। नगरपालिका को स्थानीय वाहन स्वामियों के लिए बाजार, अस्पताल, मंदिर आदि आवागमन की जगहों को एयर मार्क करने और व्यवस्था करने को कहा।
कोर्ट ने नोएडा के सेंट्रल रोड रिसर्च इंस्टीट्यूट को राज्य सरकार के निर्देश पर सड़कों का सर्वे करने को कहा। इसमें हल्द्वानी, काठगोदाम, कालाढूंगी और भवाली तथा कैंची धाम से नैनीताल को आने वाले मार्ग शामिल हैं।
सर्वे रिपोर्ट तीन माह में देने को कहा गया है। कोर्ट ने रुड़की स्थित सेंट्रल बिल्डिंग रिसर्च इंस्टीट्यूट को क्षेत्र की भौगोलिक भार वहन क्षमता की जांच करने को कहा है।
कोर्ट ने टैक्सी बाइकों और लोकल टैक्सी वाहनों को फिलहाल कोई राहत नहीं दी है। कोर्ट ने कूड़ा सेग्रीगेशन के लिए प्रत्येक घर को तीन-तीन डस्टबिन देने को कहा है।
मुख्य न्यायाधीश जी नरेंद्र व न्यायमूर्ति आलोक मेहरा की खंडपीठ में सुनवाई के दौरान अधिवक्ताओं ने पक्ष रखते हुए कहा कि लेकब्रिज चुंगी में रात आठ बजे बाद बिना पर्ची कटे वाहनों को आने दिया जा रहा है। मंदिर जाने पर वाहनों से 25 रुपये प्रति घंटे के हिसाब से शुल्क लिया जा रहा है।
नारायणनगर क्षेत्रवासियों की तरफ से कहा गया कि नारायणनगर में छोटी गाड़ियों से कूड़ा बड़ी गाड़ियों में डालने से नारायण नगर, चारखेत, सरिताताल व खुर्पाताल क्षेत्र प्रभावित हो रहे हैं। जिस पर कोर्ट ने शपथपत्र पेश करने को कहा। कोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई को 19 मई की तिथि नियत की है।

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